चित्तौड़गढ़। मकर सक्रांति के मंगल पावन पवित्र दिवस पर इससे अच्छा दान या पुण्य कार्य क्या हो सकता है कि अपनी देह ही आयुष्य पूर्ण होने पर मानव सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प ले लिया जाए। देहदान का ये संकल्प भी चित्तौड़गढ़ शहर के बाहेतियो की गली निवासी कांठेड़ परिवार के चार वरिष्ठ सदस्यों ने एक साथ ले कर मानव सेवा के लिए समाज के समक्ष अनुकरणीय और प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कांठेड़ परिवार के 84 वर्षीय लादूलाल कांठेड़ और उनकी धर्म सहायिका 79 वर्षीय रुक्मणदेवी, 80 वर्षीय बंशीलाल कांठेड़ और उनकी धर्म सहायिका 73 वर्षीय स्नेहलता ने देहदान का संकल्प पत्र भर परिजनों की मौजूदगी में श्री आचार्य तुलसी ब्लड फाउंडेशन चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष सुनील ढीलीवाल को सौंपा। ढीलीवाल ने एक ही परिवार के 4 सदस्यों के एक साथ देहदान संकल्प पत्र प्रस्तुत करने की इस पहल को अनूठी और अनुकरणीय बताते हुए कहा कि इससे समाज के अन्य लोग भी मानव सेवा के इस कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने बताया कि देहदान के चारो संकल्प पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को भेजे जाएंगे। लादूलाल और बंशीलाल भाई है और सेवानिवृत्ति से पूर्व राजकीय सेवा में शिक्षक रहे है।
देहदान संकल्प पत्र सौंपने के अवसर पर परिवार के सांवरमल कांठेड़, महावीर कांठेड़, निलेश कांठेड़, सरिता कांठेड़ आदि सदस्य मौजूद थे। गौरतलब है कि कांठेड़ परिवार के नई पीढ़ी में अग्रज सांवरमल कांठेड़ और उनकी धर्म सहायिका मंजूदेवी पहले ही देहदान का संकल्प पत्र समर्पित कर चुके है।
क्या है देहदान का महत्व-
चिकित्सा विज्ञान के छात्रों को शोध और प्रायोगिक कार्यो के लिए मानव देह की आवश्यकता होती है। देहदान करने से हमारा शरीर मृत्यु उपरांत खाक होने की बजाए मेडिकल कॉलेज के छात्रों के शोध में कार्य आता है। इससे उन्हें मानव जीवन की रक्षा और गम्भीर बीमारियों से उपचार के लिए नए-नए कार्य सीखने और शरीर की जटिल सरंचनाओं को समझने में सहायता मिलती है। देहदान का संकल्प पत्र सम्बंधित व्यक्ति की इच्छा पर परिजनों की सहमति से भरवाया जाता है।