इंदौर। पूर्व मंत्री जीतू पटवारी मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गुरुवार को पहली बार इंदौर में सार्वजनिक कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संवाद किया। उन्होंने कहा मैं इतने दिन से यहां नहीं आया तो लोग बोल रहे थे कि भैय्या आ ही नहीं रहे थे। बता दूं कि एक हनीमून पीरियड होता है, अभी चुनाव निपटे हैं तो अभी एक दो-महीने जाने दो। थोड़ा परिस्थितियों को संभलने दो, फिर हम भी यहीं है और आप भी यहीं हैं। इधर, बीजेपी ने पटवारी के इस बयान पर चुटकी ली है कि हार के बाद हनीमून पीरियड होता है, यह पहली बार सुना है।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि एक महीना 22 दिन से कई लोग तड़प रहे थे। अरे भैय्या क्या होगा, भैय्या आ ही नहीं रहे हैं। ऐसा हो गया, वैसा हो गया, यह..वो..फलाना-ढिमाका। लेकिन मैं सोचता हूं कि यह महसूस भी होना जरूरी है। किसी भी रूप में मेरी भावनाएं पवित्र हैं।
हरा देंगे तो भी मन राउ से जुड़ा रहेगा , पटवारी
उन्होंने हार का जिक्र करते हुए कहा कि राऊ विधानसभा मेरा परिवार था, है और परिवार रहेगा। चुनाव जिताएं तो सिर माथे पर और हरा भी देंगे तो परिवार के साथ जब तक मेरी सांसें चलेंगी, मेरा मन जुड़ा रहेगा। सवाल यह नहीं है कि सत्ता में रहकर ही सेवा होती है। सवाल यह है कि लोकतंत्र दो पटरियों का है। एक को सत्ता में रहकर सेवा का धर्म निभाना पड़ता है, तो दूसरे को विपक्ष में रहकर सेवा का धर्म निभाना पड़ता है।
यह पहली बार सुना रू भाजपा प्रवक्ता
पीसीसी चीफ के हनीमून पीरियड के बयान पर बीजेपी भी हमलावर हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट करके कहा कि हनीमून पीरियड....? चुनाव हारने के बाद भी हनीमून पीरियड होता है क्या...?पहली बार सुना है... खुद मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वीकार रहे है कि वो चुनाव हारने के 1 माह 22 दिन बाद आज पहली बार अपनी विधानसभा में कार्यकर्ताओं से मिलने किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में आए हैं... जब इनकी यह स्थिति है तो बाकी की क्या होगी....समझा जा सकता है....?