भोपाल। भारतीय काल गणना को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। हर एक व्यक्ति को पंचांग के विषय में जानकारी होना चाहिए। संस्कृति को जानने के लिए संवत्सर का ज्ञान आवश्यक है। इससे हम अपनी भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर पाएंगे। यह बात केंद्रीय संस्कृत विवि में आयोजित नवसंवत्सर महोत्सव में केंद्रीय संस्कृत विवि नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी उपस्थित थे। सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विवि राजीव गांधी परिसर शृंगेरी के निदेशक प्रो. हंसधर झा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम निदेशक प्रो. रमाकांत पांडेय के निर्देशन में हुआ। इस महोत्सव में केंद्रीय संस्कृत विवि के 28 महाविद्यालयों और शोध केंद्रों के प्राध्यापक, स्टूडेंट ऑनलाइन जुडे़।