चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ में आयोजित 21वां कल्याण महाकुंभ आषाढ़ कृष्ण अष्टमी पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। महाकुंभ के अंतिम दिन ठाकुर श्री कल्लाजी सहित पंचदेवों के दिव्य दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। दोपहर 12:32 बजे गर्भगृह के पट खुलते ही स्वर्ण-रजत श्रृंगार में विराजित ठाकुरजी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
महाआरती, शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच पूरा वेदपीठ परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। मेवाड़, मालवा, वागड़, गुजरात, मारवाड़ और हाड़ौती सहित देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के दर्शन कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
महाकुंभ के दौरान आयोजित 51 कुंडीय अतिरुद्र महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें लगभग 1500 यजमानों ने करोड़ों आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण और अच्छी वर्षा की प्रार्थना की।
भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने सामूहिक मातृ-पितृ पूजन को सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी प्रयास बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने श्री लिंग महापुराण कथा में शिवलिंग की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं से श्रद्धा और विधि-विधान के साथ शिवलिंग की पूजा करने का संदेश दिया।
महाकुंभ के सांस्कृतिक आयोजन में प्रसिद्ध भजन गायक महावीर सांखला और उनकी मंडली ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्तिरस में सराबोर रखा। पूरे आयोजन के दौरान वेदपीठ परिसर में भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपरा की अनुपम छटा देखने को मिली।