बुरहानपुर। वन विभाग द्वारा हर साल जंगलों में होने वाला तेंदुपत्ता संग्रहण समितियों से कराया जाता है। इस साल तीन समितियां नेपानगर, धुलकोट और डोईफोड़िया तेंदुपत्ता संग्रहण कर रही हैं। इससे जहां वन विभाग को राजस्व मिलता है तो वहीं आदिवासी परिवारों को रोजगार। 14 मई से जिले में तेंदुपत्ता संग्रहण शुरू हुआ है। खास बात यह है कि झिरपांजरिया में 15 मई को यहां के एक नाकेदार कमलेश रघुवंशी ने आदिवासी महिला के पैर धोए उसके बाद चप्पल पहनाकर तेंदुपत्ता संग्रहण शुरू कराया।
जंगल बचाने में सहयोग कर रहे, इसलिए पैर धोए
तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए करीब 200 से अधिक आदिवासी परिवार झिरपांजरिया में जुटे हुए हैं। इस दौरान यहां पदस्थ नाकेदार कमलेश रघुवंशी ने एक आदिवासी महिला के पैर धोए। उसे चप्पल पहनाई और फिर तेंदुपत्ता संग्रहण शुरू कराया। कमलेश रघुवंशी ने कहा यह प्रयास जंगल बचाने के लिए किया जा रहा है। तेंदुपत्ता आदिवासी परिवारों के लिए हरा सोना है। इसके रेट भी अच्छे मिल रहे हैं। फिलहाल 4 हजार रूपए मानक बोरा का रेट है। तेंदुपत्ता बीड़ी बनाने में काम आता है।
जिले में 3 समिति, नेपानगर, धुलकोट और डोईफोड़िया कार्यरत हैं जहां काफी संख्या में आदिवासी परिवारों को रोजगार मिल रहा है। यह परिवार लघु वन उपज समितियों से जुड़ कर तेंदुपत्ता संग्रहण कर रहे हैं। अकेले झिरपांजरिया में 200 परिवार इससे जुड़े हैं जबकि तीन समितियां मिलाकर करीब 5 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। वन विभाग ने तीन समितियों को इस साल 4200 मानक बोरे का लक्ष्य दिया है। 14 मई से संग्रहण शुरू हुआ है।
हर संग्राहक को देंगे पांच-पांच पौधे
इसे लेकर बुरहानपुर एसडीओ अजय सागर ने बताया हर संग्राहक को वन विभाग की ओर से 5-5 फलदार पौधे भी दिए जाएंगे ताकि वह अपने घर के आंगन में, जंगल में उसे रोपित करें। इससे आय होगी। पांच फलदार पौधों में कटहल, नींबू, जाम, आम, सुरजाना फल्ली शामिल है। वहीं संग्राहकों को पैम्फलेट भी वितरित किए गए।