इंदौर। शहर में बढ़ते अपराधों को देखते हुए एवं आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए युवतियां और लड़कियां मजबूत बन रही हैं। प्रशिक्षण शिविर में युवतियां आत्मरक्षा के लिए गुर सीख रही हैं। शिविर में शस्त्र कला लाठी, बनेठी, तलवार, गट्टा फरी, बंधीश आदि शस्त्र कला के खेल सिखाए जा रहे हैं।
इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इंदौर के मल्हारगंज क्षेत्र में कुछ बुद्धिजीवियों ओर युवाओं ने क्षेत्र के बालक- बालिकाओं को निःशुल्क शस्त्र कला (सेल्फ डिफेंस) सिखाने की पहल की है। मल्हारगंज थाने के पास ही भानुदास उद्यान में सैनिक अंकित यादव (पहलवान), योगेश शर्मा, अनुज यादव द्वारा बच्चों और युवतियों को निरूशुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा के गुर सिखा रहे हैं।
सैनिक अंकित यादव ने बताया कि युवाओं और बच्चों के साथ साथ महिलाओं और लड़कियों को भी शस्त्र कला सीखना जरूरी है। आजकल की युवा पीढ़ी तेजी से डिजिटल दुनिया की तरफ बढ़ रही है, इसके साथ शारीरिक व्यायाम भी जरूरी है, ताकि हमारे देश का युवा मानसिक और शारीरिक दोनों तौर पर मजबूत बने और नशे से भी दूर रहे।
सनातन धर्म के प्रत्येक देवी-देवताओं के हाथ में शस्त्र और शास्त्र दोनों चीजें उपलब्ध रहती है। मतलब हमें हमारे देवी- देवताओं से ही प्रेणना लेना चाहिए कि हमें शस्त्र और शास्त्र दोनों का ही ज्ञान होना आवश्यक है। कलम और लाठी दोनों जरूरी हैं कलम हमें जीना सिखाएगी, लाठी हमें समाज में रहना सिखाएगी। शस्त्र कला को पूर्ण व्यायाम भी कहा गया है।
इस प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र के समाजसेवी महंत महेश गिरि, सुधीर सोलंकी एवं क्षेत्र के रहवासियों का भी सहयोग मिल रहा है। यहां बच्चे, युवक और लड़कियां शस्त्रों के साथ शास्त्रों का भी ज्ञान अर्जित कर रही हैं। साथ ही लड़कियों व महिलाओं को उनके अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों की जानकारी भी दी जा रही है। रानी लक्ष्मीबाई, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप आदि महापुरूषों का चरित्र भी बताया जा रहा है। इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य युवतियों और बच्चों में जन जागृति एवं आत्मरक्षा के गुर सीखाना है।