नीमच। जिले के जीरन कॉलेज की पूर्व प्रभारी प्राचार्य दीपा कुमावत और स्टॉफ के बीच हुए विवाद को आज 16 मई को दो साल पूरे हो गए है। मामले में पीड़ित स्टॉफ ने कुमावत के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया और उसके बाद कोर्ट में भी मामला पहुंचा, लेकिन वहां केस की सुनवाई रफ्तार काफी धीमी चल रही हैं। वहीं इस मामले में उच्च शिक्षा विभाग ने कागजी खानापूर्ति के लिए जांच भी कराई और उसका प्रतिवेदन भी वरिष्ठ कार्यालय भेजा। फिर इसके बाद यह फाइल बंद हो गई। अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। विवाद के बाद कुमावत को जिले में ही दूसरी जगह अटैच कर दिया, जिससे उसके विषय की पढाई प्रभावित हो रही है। क्योंकि भले ही विभाग से उसे दूसरी जगह अटैच कर दिया, लेकिन जीरन से पद रिक्त नहीं होने से वहां दूसरे की नियुक्ति या अतिथि विद्वान भी नहीं रखा जा सकता हैं।
गौरतलब हैं कि जीरन कॉलेज की पूर्व प्रभारी प्राचार्य दीपा कुमावत द्वारा अभद्रता व प्रताड़ित करने को लेकर जीरन कॉलेज के स्टॉफ द्वारा उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। जिसकी जीरन थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद कुमावत के खिलाफ 16 मई 2022 को गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। इसके बाद कुमावत कभी बीमारी तो कभी अन्य बहाना बनाकर कॉलेज नहीं आई। विवाद बढ़े नहीं इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक कमेटी बनाकर विभागीय जांच करवा ली। जिसमें स्टॉफ सदस्यों ने कुमावत के खिलाफ प्रताड़ना करने के संबंध में कथन भी दिए। जांच कमेटी द्वारा विभाग को दिए गए प्रतिवेदन का खुलासा अब तक नहीं हुआ। वहीं विवाद को शांत करने के लिए कुमावत को शहर के जाजू कन्या कॉलेज में ही डिप्लायमेंट पर अटैच कर रखा है। इधर पुलिस केस दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी के डर से कुमावत बचती रही और हाईकोर्ट से जमानत लेना पड़ी। कोर्ट में उक्त प्रकरण का चालान पेश तो हो गया है लेकिन केस की सुनवाई की रफ्तार काफी धीमी है। कोर्ट केस की सुनवाई में जरूर समय लग सकता है लेकिन उच्च शिक्षा विभाग तो इसमें निर्णय लेकर कुमावत का तबादला या निलंबन जैसी कार्रवाई तो कर सकता है परंतु वह भी नहीं हुआ।
गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं के साथ सही व्यवहार नहीं-
गर्ल्स कॉलेज में जब से दीपा कुमावत को डिप्लायमेंट पर अटैच किया है, वहां भी उसका रवैया पहले जैसा ही है। छात्राओं ने बताया कि सही तरीके से नहीं बोलती है और कैरियर खराब करने की धमकी देती है। इस संबंध में अभिभावकों ने कॉलेज प्राचार्य एन के डबकरा को भी अवगत कराया है। जिस पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह कुमावत को समझाइश देंगे।
उच्च शिक्षा भोपाल में सांठगांठ की आशंका-
उच्च शिक्षा विभाग के भोपाल स्थित वरिष्ठ कार्यालय पर जिले के कई प्रोफेसरों की अच्छी सांठगांठ होने की आशंका है। यहां के 3-4 ऐसे मामले आए, जिसमें कॉलेज के प्राचार्य से लेकर प्राध्यापकों पर कई गंभीर आरोप लगे और शिकायतें हुई लेकिन उन पर सिर्फ जांच के अलावा कुछ नहीं हुआ। भोपाल स्थित वरिष्ठ कार्यालयों में उनके मामलों से संबंधित फाइलें दबा दी जाती है या फिर तगड़ी सांठगांठ के चलते कुछ कार्रवाई आदेश जारी नहीं हो पाते है।
वरिष्ठ कार्यालय को जल्द निर्णय लेने का आग्रह करेंगे-
जीरन कॉलेज के ताजा मामले को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के उज्जैन संभाग अतिरिक्त संचालक एचएल अनिजवाल से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि जांच समिति का प्रतिवेदन वरिष्ठ कार्यालय भेज दिया है, आगे की कार्रवाई वहीं से होना है। यह बात सही हैं कि ऐसे मामले में जब अस्थायी तौर पर प्राध्यापक का कॉलेज बदल जाता हैं, तो वहां कोई अतिथि शिक्षक या अन्य किसी की नियुक्ति नहीं होने से उस विषय की पढाई प्रभावित होती है। मैं वरिष्ठ कार्यालय में अवगत कराउगा कि जल्द ही इस तरह के मामलों का निपटारा किया जाए ताकि बच्चों का नुकसान तो नहीं हो।