नीमच। शहर में इस वर्ष पेयजल संकट गहराएगा। इसका अंदाजा तो उसी समय हो गया था जब इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा हुई थी। नीमच को पेयजल उपलब्ध करवाने वाला जल स्त्रोत जाजूसागर हर्कियाखाल डेम अपनी क्षमता से बहुत कम भर पाया था। वैकल्पिक जलस्त्रोत ठीकरिया से नीमच को आंशिक जल ही मिलता है। हमारी नगरपालिका कितना ही दावा करे परन्तु जलसंकट के दौर में ठीकरिया स्थाई समाधान नहीं बन सकता। वह भी तब ही वैकल्पिक जलापूर्ति कर सकता है जब हर्कियाखाल डेम पूरा भरा हो तो गर्मियों में इसके सहारे काम चल जाता है वरना हमें कुएं, पोखर, हेण्डपम्प टटोलने पडते हैं जो अब नगरपालिका कर रही है।
ट्रिपल इंजन की सरकार के हमारे तीनों जनप्रतिनिधि सत्ता के मद में इतने डूबे हुए हैं कि ये जन समस्याओं को कभी गंभीर से लेते ही नहीं। सांसद महोदय के लिये नीमच कभी प्राथमिकता में रहा ही नहीं, उनका नीमच के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया जगजाहिर है। हमारे विधायक की कमी भी दूरगामी सोच की रही ही नहीं। उनको जो भी सरकार से मिल जाता है वह सरकार की कृपा मानकर स्वीकार कर लेते हैं। नीमच के हक की लडाई में वे हमेशा पिछडे ही रहे हैं। नीमच को जो भी सुविधाएं मिली हैं वह अधिकांश सामान्य रूटीन में मिली हैं। कुछ अलग पाने के लिये जिससे नीमच की आम जनता लाभान्वित हो, जुझारू प्रयास किया हो, कभी नजर नहीं आया।
चम्बल के पानी के लिए नीमच की कृति संस्था पिछले 15 वर्षों से आवाज उठा रही है, परन्तु इस आवाज को विधायक महोदय कभी भी विधानसभा और संसद के गलियारों में दमदारी से नहीं पहुंचा पाए। नतीजा सामने है कि हमारे बाद प्रयास करने पर भीलवाडा और गरोठ, सीतामउ, मंदसौर को चम्बल का पानी मिल गया, वहां दोनों समय पानी मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों को नल से पेयजल पहुंचाने की केन्द्र सरकार की नल जल योजना जो ग्रामीण क्षेत्र के लिए बनी है इसे हमारे क्षेत्र में आने में सात साल लग गए, अब जाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पाईप पडे हुए दिखने लगे हैं और टंकी निर्माण की प्रक्रिया भी शायद शुरू हो पाई है। पानी मिलने में कितना समय लगेगा, पता नहीं। इस योजना में नीमच शहर शामिल नहीं है, यह स्पष्ट है, मगर हमारे विधायक अभी भी गफलत में हैं और जगह जगह अपने भाषण में नीमच को चम्बल की पेयजल योजना में शामिल होने की घोषणा करते रहते हैं। शायद इसीलिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार के लिए नीमच आए थे तब हमारे विधायक महोदय ने मंच से अपने भाषण में कहा था कि आपने हमें सब कुछ दे दिया है, अब मैं क्या मांगुं ? तब भी हमारे विधायक महोदय को चम्बल के पानी का ख्याल नहीं आया और लोकसभा चुनाव में जबकि इस समय जल संकट गहराया हुआ है इसकी चर्चा तक करना जरूरी नहीं समझा।
कहते हैं कि दुबले को दो आषाढ पर हमें तो तीसरे आषाढ के रूप में नीमच नगरपालिका अध्यक्ष मिली हैं। इनको जल समस्या का अंदाजा था ही नहीं। इसीलिए हर्कियाखाल बांध से चोरी और अवैध खेती पर इन्होंने कहा था कि पानी की चोरी और अवैध खेती को हम रोक नहीं सकते तो इसे वैध कर देते हैं। बच्चों वाली बातें करने से प्रशासन नहीं चलता, उसके लिए ठोस दूरगामी परिणाम देने वाले काम करने पडते हैं। इसमें इनका कसूर इतना नहीं है, कसूर तो उनका है जिन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिये इनको इस पद पर बिठाया और उन सलाहकारों का है जो अपना मतलब पूरा करने के लिये इन्हें उल्टी सीधी सलाह देते हैं, नतीजा सामने है।
अल्पवर्षा के कारण जिले में गंभीर जल संत्रास उत्पन्न होने की संभावना को देखते हुए जिला प्रषासन ने नीमच को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिय था मगर नगरपालिका कतई गंभीर नहीं थी।
नीमच की जनता हमेषा की तरह मौन ही रही जबकि जागरूक पत्रकारों, कुछ विपक्षी नेताओं और कृति संस्था ने सतत इस बारे में चेतावनी दी थी कि इस बार नीमच में गंभीर जल संकट होने वाला है।
इस समस्या के एक मात्र स्थायी हल के लिये नीमच की जागरूक कृति संस्था विगत 15 वर्षों से नीमच को चम्बल का पानी मिले, इसकी आवाज उठाती चली आई है। इस आवाज को भीलवाडा, मंदसौर, गरोठ के जनप्रतिनिधियों ने सुन ली और वहां चम्बल का पानी आ गया। यह अलग बात है कि मंदसौर में पाईप लाईन बिछाने में हद से ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ। वहां की पाईप लाईन बार बार फूट जाती है।
नीमच के आसपास चम्बल के पानी के लिए सडकों के किनारे पडे पाईप को देखकर नीमच की जनता इस भ्रम में नहीं रहे कि यह उनके लिए है। यह वर्षों पहले बनी ग्रामीण जनता के लिये नल जल योजना के पाईप हैं, जो अब डाले जाने का मुहूर्त्त आया है। पानी कब आएगा पता नहीं ? पर नीमच षहर से चम्बल का पानी अभी दूर है। इसके लिए नीमच की जनता को जागना पडेगा वरना नेताओं के झांसों में इतने साल निकाले और निकलते जाएंगे। चम्बल का पानी गांवों तक आ जाएगा मगर हम खपते रह जाएंगे।