चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्मानुरागियों से रूबरू होते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने बताया कि ज्ञानियों के अनुसार हमें सदा अंतरावलोकन के माध्यम से देखने की कोशिश करनी चाहिए कि हमारे द्वारा आत्म हित और आत्मा को नुकसान पहुंचाने वाले कौन कौन से कार्य किए गए हैं..? हमें अपना जज स्वयं बन कर जजमेंट भी ख़ुद ही करके आत्मा का पतन करने वाले बुरे कार्यों की सज़ा ख़ुद को सुनाते हुए उन कार्यों की पुनरावृत्ति भविष्य में नहीं करने बाबत दृढ़ संकल्प करना चाहिए। हम ऐसा सम्यक प्रयास निरंतर जारी रख कर आत्म शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने उत्तराध्ययन सूत्र के 13वें अध्ययन का वाचन करने के बाद बताया कि हमने पुण्य की बदौलत जो सांसारिक एश्वर्य प्राप्त किया है उसमें आसक्ति भाव नहीं रखेंगे और बाह्य भौतिक आकर्षण के झांसे में नहीं उलझेंगे तो निश्चय ही मुक्ति मंजिल के समीप पहुंचने वाले बनेंगे।
महासती पुण्यप्रिया द्वारा गुरु सप्ताह महोत्सव के चौथे दिन आज़ विजय गुरूदेव के जीवन से संबंधित प्रश्न पूछ कर धर्म सभा में उपस्थित सुज्ञ श्रावक श्राविकाओं से उत्तर प्राप्त किए गए एवं घी के त्याग का लक्ष्य रखा गया। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।