चित्तौड़गढ़। सनातन संस्कृति के अति प्राचीनतम पावन स्थल श्री काल भैरव जी (काला बावजी मंदिर) पॉलिटेक्निक कॉलेज के निकट, बोजुंदा, चितौड़गढ़ में सनातन संस्कृति से ओतप्रोत ष्अभिनंदन 2025 आयोजनष् के तहत संगीतमय नानी बाई का मायरा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 31 दिसंबर को दोपहर नानी बाई का मायरा कथा के बाद रात्रि में भजन संध्या आयोजन के बीच 2024 कैलेंडर वर्ष की विदाई और 2025 के स्वागत का सनातन संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रम अविस्मरणीय बन गया। जिसमें बड़ी संख्या में ठिठुराती सर्दी के बावजूद श्रद्धालु बड़ी संख्या में भक्तिभाव से झूमते रहे। 108 दीपक के साथ श्री काल भैरव जी और मां कालिका की आरती अभिनंदन 2025 का अलौकिक दृश्य बना।
मंदिर के मुख्य पुजारी बाबूलाल जटिया ने बताया कि 31 दिसंबर की देर शाम नव वर्ष अभिनंदन 2025 के तहत भजन संध्या में भी काफी उत्साह छाया रहा। श्री काल भैरव की भक्ति एवं विभिन्न भजन कीर्तन के साथ शंकर लक्खा एन्ड पार्टी द्वारा देर रात तक कीर्तन की प्रस्तुति की जिसमें श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया। भगवान श्री काल भैरव जी की 108 दीपक से सजावट करके कैलेंडर नव वर्ष प्रारंभ होते ही संगीतमय महा आरती की गई। सनातन संस्कृति के अनुसार भक्ति भाव पूर्वक कैलेंडर नव वर्ष का स्वागत किया और प्रभु प्रार्थना के बाद एक दूसरे को बधाई दी और काल भैरव जी का आशीर्वाद लिया।
इधर दोपहर प्रख्यात भजन गायक शंकर लक्खा एण्ड पार्टी द्वारा संगीतमय नानी बाई का मायरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे रहे। शंकर भाई लक्खा द्वारा जीवन्त कथा करवाई जिसमे ठाकुर जी, नानी बाई, कृष्णा खाती का रूप धारण किया गया और ठाकुर जी ने नरसिंह जी की गाड़ी भी चलाई इसी के साथ ही हुंडी का प्रसंग भी पढ़ा गया एवं मायरा भरा गया।
तीन दिवसीय आयोजन में आसपास एवं दूरदराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन में आगमन पर संतों, सहित जनप्रतिनिधियों, गणमान्य जनों व श्री काल भैरव श्रद्धालुओं का मंदिर के मुख्य पुजारी बाबूलाल जटिया के सानिध्य में भक्तों ने भाव भीना स्वागत किया।