मनासा। स्थानीय रामद्वारा में आयोजित 98वें सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं सत्संग में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के विद्वान संत समर्थरामजी (पुष्कर राज) ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अजर-अमर है। ईश्वर तत्व से जुड़ना ही सच्ची भक्ति है और इसी मार्ग पर चलकर मनुष्य मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
चातुर्मास के लिए मनासा में विराजित संत समर्थरामजी ने कहा कि मनुष्य ईश्वर का अंश है, जो सदैव प्रकाशमान रहता है। ईश्वर की आराधना से जीवन का अंधकार दूर होता है। उन्होंने बताया कि महापुरुषों ने मानव कल्याण के लिए कर्म, भक्ति और ज्ञान के मार्ग बताए हैं, जिनमें स्वामी श्रीरामचरणजी महाराज ने अपने ग्रंथ वाणीजी में भक्ति को सर्वाेच्च स्थान दिया है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रेमपूर्वक ईश्वर भक्ति करने का आह्वान किया।
सनातन सत्संग मंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ लाभार्थी जोलान्या परिवार के सदस्यों ने भगवान श्रीहनुमान एवं स्वामी श्रीरामचरणजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर संत समर्थरामजी का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में राजकुमार मारू, सत्यनारायण सोनी, विजय उपाध्याय, अरुण झंवर, कमल विजयवर्गीय और ओम सोनी सहित अन्य भजन गायकों ने भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के अंत में सनातन सत्संग मंडल ने सभी श्रद्धालुओं एवं लाभार्थी परिवार का आभार व्यक्त करते हुए आगामी 99वें सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं सत्संग में 11 अगस्त, मंगलवार रात्रि 8ः30 बजे श्री अयोध्यापुरी पंजाबी समाज धर्मशाला, उषागंज, मनासा में सपरिवार शामिल होने का आग्रह किया।