नीमच। शहर के उप नगर नीमच सिटी में रंग तेरस का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। जिसमें माहेश्वरी मोहल्ले में ग्वालियर रियासतकालीन परंपरा के अनुसार भेरूजी को 5 फीट गहरे गड्ढे से बाहर निकाला गया। भेरूजी को बकरे की खाल में पानी से स्नान कराकर, पूजा अर्चना की गई और फिर उन्हें ठेला गाड़ी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया गया। इस दौरान क्षेत्रवासी नए कपड़े पहनकर आशीर्वाद लेने आए। 10 दिनों तक विशेष पूजा होती है, जिसके बाद भेरूजी को फिर से गड्ढे में गाड़ दिया जाता है। यह परंपरा 200 साल से ज्यादा पुरानी बताई जाती है। रंग तेरस के अवसर पर खास गैर निकाली गईं। रंग तेरस का पर्व धूमधाम से मनाते हुए शहर के मुख्य मार्गों पर निकली गैर में सर्व समाज के लोग शामिल हुए। एक दूसरे को गुलाल लगाया। गैर में डीजे पर बजे रहे होली के गीतों की धुन पर नृत्य करतीं युवाओं की टोली निकली।
मान्यता के अनुसार भेरूजी को गड्ढे में दबाकर रखना आवश्यक होता है, ताकि पूरे साल शांति बनी रहे। एक साल चूक के कारण मोहल्ले में 13 मौतें हुई थीं, जिसे इस परंपरा से जोड़ा जाता है। इस अवसर पर भेरूजी को दाल-बाफले और लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है और क्षेत्र में इसे एक बड़े त्योहार की तरह मनाया जाता है। गैर के दौरान पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था रही।