नीमच। शहर मेडिकल कॉलेज में सेवारत एसोसिएट सर्जन डॉक्टर बृजेंद्र स्वरूप ने यहां के जिला चिकित्सालय में उपलब्ध बहुत ही सीमित साधन और सुविधाओं के बावजूद पायलोरिक परफोर्रेशन यानी आंतों के फटे होने का एक बड़ा सफल ऑपरेशन कर मरीज को नई जिंदगी देने में सफलता अर्जित की, और फिर एक बार यह साबित कर दिया कि डॉक्टर को नेक्स्ट टू गॉड क्यों कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि नीमच बघाना के धनेरिया कला रोड निवासी चांदमल आर्य ने आंतों की तकलीफ को लेकर गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल में डॉक्टर बृजेंद्र स्वरूप से परामर्श लिया। डॉक्टर ने जांच करके पाया कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत ऑपरेशन करना जरूरी है। 55 वर्षीय चांदमल को मुंह का कैंसर, लिवर सिरोसिस, एल्ब्यूमिन आदि गंभीर बीमारियां थी। वजन मात्र 40 किलो था। मरीज धूम्रपान और नशे का आदि था। मरीज की हालत ऐसी थी कि वह खड़ा नहीं हो पा रहा था। ऐसे में ऑपरेशन रिस्की हो सकता था। विपरीत और चुनौती पूर्ण परिस्थितियों में परिजनों की सहमति से डॉ बृजेंद्र स्वरूप ने अपने बुलंद हौसले और अनुभव से मरीज की फटी आंत के ऑपरेशन को अंजाम दिया।आंतों में साढ़े तीन सेंटीमीटर का छेद था। इस पूरी स्थिति में डॉक्टर बृजेंद्र और उनकी टीम ने मरीज की इस गंभीर बीमारी का सफल ऑपरेशन करने में कामयाबी हासिल की। अब चांदमल आर्य पूरी तरह ठीक है। चल फिर रहे हैं। जिला अस्पताल में परामर्श से लेकर ऑपरेशन तक मरीज़ का निशुल्क इलाज हुआ है।चांदमल को स्वस्थ देखकर परिजन भी प्रसन्नचित है। डॉ बृजेंद्र स्वरूप ने बताया कि नीमच में उनके द्वारा करीब 500 ऑपरेशन किए गए। जिसमें सभी मरीज स्वस्थ हैं। चांदमल आर्य के ऑपरेशन को वह अपने चुनिंदा बड़े ऑपरेशन की गिनती में शुमार करते हैं।