नीमच। मप्र में अगले महीने नीमच, मंदसौर जिलों में औषधीय कृषि के लिए उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की जिलेवार मैपिंग की जाए। साथ ही विश्वविद्यालय सहित अन्य सरकारी विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित करने तथा प्रदेश में पीपीपी मोड पर नर्सरियों विकसित करने के लिए कार्ययोजना बने।
डॉ. यादव गुरुवार को सीएम हाउस में उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 22 लाख 72 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जा रही हैं, इसे 5 सालों में 33 लाख 91 हजार हैक्टयर तक ले जाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बागवानी विकसित करने को जन आंदोलन बनाना जरूरी है। सभी विधायक और पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में आदर्श बागवानी या नर्सरी विकसित कर क्षेत्र के किसानों को अपने स्तर पर प्रेरित करें। श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए किसानों को पुरस्कृत करें।
जबलपुर की मटर, खरगोन की मिर्च को दिलाएंगे जीआई टैग
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिशें जारी हैं। अब खरगोन की लाल मिर्च, जबलपुर की मटर, बुरहानपुर के केले, सिवनी के सीताफल, बरमान नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गजरिया आम, इंदौर के मालवी आलू, रतलाम की बालम ककड़ी, जबलपुर के सिंघाड़ा, धार की खुरासानी इमली और इंदौर के मालवी गराडू को जीआई टैग दिलाने की कोशिश हो रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पालन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की। सीएम ने कहा कि प्रदेश के हर बच्चे को समय पर पुस्तकें, गणवेश, छात्रवृत्ति, साइकिल समेत सभी जरूरी सुविधाएं मिल जाएं, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। बैठक के दौरान बताया गया कि मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड की रुक जाना नहीं योजना 2016 में शुरू की गई थी, तब से अब तक 6 लाख 41 हजार 553 से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल चुका है। अब सीबीएसई के लिए भी इस योजना को ऑन डिमांड शुरू किया गया है।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सीएम को बताया कि मप्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत करने का प्रयास कर रहा है। इसमें हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, माटी कला, सोलर एनर्जी, परिधान निर्माण, बांस कला इत्यादि क्षेत्रों में रोजगार मूलक प्रशिक्षण कोर्स शुरू किए गए हैं। इस योजना में प्रदेश के 100 आकांक्षी युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार से भी जोड़ा जाएगा। इस योजना को ह्यूमन कैपिटल बैंक के रूप में प्रारंभ किया जा रहा है। इसका आशय है कि जनभागीदारी से धन दान के रूप में मांग कर बैंक स्थापित किया जा रहा है। प्रदेश के एक जिले में कौशल विकास के लिए राज्य स्तरीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है। लौट चलें योजना में ड्रापआउट विद्यार्थियों को बगैर किसी फीस के परीक्षा में बैठने का अवसर देने और कोचिंग की व्यवस्था की है।