चीताखेड़ा। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर चीताखेड़ा हल्का मोज़ा पटवारी नरेन्द्र योगी के क्षेत्र में आवरी माताजी रोड़ पर दशहरे मैदान के पास स्थित शासकीय भूमि इन दिनों सुर्खियों में है। शासकीय भूमि पर दो महिलाओं के बीच हुए विवाद का फैसला पटवारी कार्यालय में क्या हुआ अल्ले दल्ले में पटवारी की नोकरी की चढ़ गई बलि । करें कोई भरे कोई वाली कहावत चीताखेड़ा में चरितार्थ होती देखी। चतरी बाई बंजारा का कहना है कि मेने नानी बाई मेघवाल को डेढ़ लाख रुपए दिए वो खेत पर नानी बाई द्वारा की गई तार फेंसिंग और खेत में की गई मेहनत का खर्चा पेटे दिये है, मैंने कोई अतिक्रमण नहीं बेचा है। पटवारी को इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। बस यह समझोता की पंचायती पटवारी कार्यालय में हुई। बस खुराफातियों ने अपनी राजनीतिक पेंतरेबाजी में पटवारी को अपना निशाना बनाकर अपनी भड़ास पूरी कर ली। मैं इस जमीन के खातिर जान दे दूंगी पर जमीन नहीं जाने दूंगी।43 सालों से शासकीय रिकॉर्ड में मेरा अतिक्रमण दर्ज है। चीताखेड़ा -आवरीमाता जी मार्ग से लगी शासकीय भूमि पर विगत 43 सालों से उक्त भूमि पर आज तक गांव की ही चतरी बाई पति हरी सिंह बंजारा 50 आरी जमीन पर आज तक काबिज हैं और उस पर खेती करती आ रही हैं। भू-राजस्व विभाग के कागजी रिकार्ड में कब्जा बकायदा दर्ज है जिसका समय-समय पर तहसीलदार द्वारा किए जाने वाले दण्डित जुर्माना भी जमा करवाती आ रही है। उक्त शिकायत महिला की बेशकिमत जमीन पर नियत खराब हो गई और उस पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के उद्देश्य को लेकर गांव के ही कुछ राजनैतिक लोगों के संरक्षण में आए दिन जनसुनवाई शिविर में तो कभी तहसील में तो कभी अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालयों के चक्कर लगाने लगी। और भूमि पर काबिज चतरी बाई को उक्त भूमि से बेदखल करने लगी। कुछ लोगों ने यह देख दोनों के बीच आपसी समझोता करवाया गया जिसमें महिला नानी बाई मेघवाल ने आपसी समझोते में शिकायत वापस उठाने एवं उक्त जमीन पर तार फेंसिंग और अन्य किए गए खर्च के व भविष्य में शिकायत नहीं करने के एवज में पांच लाख रुपए की डिमांड रखी जिस पर पांच जनों ( पंचों) के बीच डेढ़ लाख रुपए में यह फैसला हुआ है । किए गए फैसले से कोई मुकरे नहीं गवाह के सबूत के चक्कर में दोनों महिलाएं पटवारी कार्यालय पहुंच गई। हमारे विवाद में पटवारी का कोई हस्तक्षेप नहीं है और ना पटवारी ने हमसे कोई पैसा लिया। पूर्व में की गई शिकायत वापस उठाने और कभी इस मामले में कोई भी शिकायत नहीं करने पर आपसी समझोता हुआ और बकायदा आपसी पंचनामा भी लिखा गया। दोनों महिलाओं का विवाद का फैसला अल्ले दल्ले में पटवारी के नोकरी की बलि चढ़ गई।
इनका कहना -
मैं इस जमीन पर 40-42 सालों से खेती करती आ रही हूं। इस भूमि के अलावा मेरे पास कोई जमीन नहीं है। अगर किसी ने मुझे जमीन के मामले में परेशान किया तो मेरे सभी बच्चों को जहर देकर खुद भी खाकर मर जाउंगी। जिसकी जवाबदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। इस भूमि पर खेती कर 5 बच्चों का भरण-पोषण कर मेरा परिवार चला रही हूं। हजारों रुपए जुर्माने के मैं जमा करवा चुकी हूं। इस गांव में मैं कोई अकेली ही शासकीय भूमि पर कब्जा करने वाली नहीं हूं जो मेरे ही खिलाफ इतनी शिकायते की जा रही है।खूद नानी बाई मेघवाल ने पूरानी पंचायत के पास स्थित पीडब्ल्यूडी विभाग की प्राचीन सम्पत्ति पर एवं चौनपुरा रोड़ से लगी शासकीय भूमि पर कब्जा कर रखा है।