भगवानपुरा। शासकीय महाविद्यालय भगवानपुरा के प्रभारी प्राचार्य एवं रसायन शास्त्र के प्रोफ़ेसर डॉ. प्रकाश सोलंकी का हाल ही में हुआ प्रशासनिक स्थानांतरण क्षेत्रीय जनमानस, विद्यार्थियों एवं शिक्षा जगत के लिए आश्चर्य एवं चिंता का विषय बन गया है। उनके स्थानांतरण की सूचना मिलते ही महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों, पालकों, जनप्रतिनिधियों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों में असंतोष व्याप्त हो गया है।
डॉ सोलंकी ने न केवल भगवानपुरा जैसे नवस्थापित महाविद्यालय को एक सशक्त शैक्षणिक पहचान दी, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और नवाचार की एक मिसाल भी प्रस्तुत की। चाहे वह शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम की उपलब्धि हो या प्रदेश का पहला प्री-यूनिवर्सिटी एग्ज़ाम आयोजित करना कृ डॉ. सोलंकी का योगदान अद्वितीय रहा है। उनके कार्यकाल में मतदाता जागरूकता, नशामुक्त परिसर, रक्तदान- मानव सेवा के रूप में 25 बार रक्तदान कर चुके हैं, जल प्रबंधन, आदिवासी संस्कृति संरक्षण, स्कूल के अनुपयोगी फ़र्नीचर को स्वयं के ख़र्चे पर रिपेयर करवाकर महाविद्यालय के लिए उपयोग हो रहा है, महाविद्यालय को आवंटित भूमि पर सीमांकन के लिए श्रमिक ना मिलने पर श्रमिक के रूप में स्वयं काम करना, विद्यार्थियों की फीस स्वयं देना जैसे अनेकों समाजोपयोगी नवाचारों को मूर्त रूप मिला। प्रो सोहन गुर्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. सोलंकी के कार्यों की व्यापक सराहना हुई है, जिनके लिए दो बार नागरिक सम्मान भी प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डॉ. सोलंकी का स्थानांतरण केवल वे ही प्रभावित नहीं हो रहे हैं उनकी पत्नी डॉ. रजनी सोलंकी भी इसी महाविद्यालय में पदस्थ हैं, तो यह नियमों का एकतरफा और अनुचित प्रयोग माना जाएगा, क्योंकि डॉ प्रकाश सोलंकी के स्थानांतरण में स्थानांतरण नीति का भी खुला उल्लंघन होकर उनका दाम्पत्य जीवन भी प्रभावित हो रहा है। वरिष्ठ समाजसेवी यशवंत उर्फ़ पप्पू जायसवाल ने कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में भी यदि राजनीतिक द्वेष हावी होने लगे, तो इससे आने वाली पीढ़ियाँ प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा, ष्यह स्थानांतरण केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं लगता, बल्कि यह योग्य एवं कर्मठ शिक्षकों के बढ़ते कद से असहज हो रहे कुछ तत्वों का दुष्परिणाम प्रतीत होता है।ष्
तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम स्थानांतरण निरस्त करने हेतु ज्ञापन सौंपारू महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के द्वारा चिलचिलाती धूप में रैली के रूप में तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार संजय चौहान को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर डॉ प्रकाश सोलंकी के स्थानांतरण निरस्त की माँग की गई।
विद्यार्थियों और स्थानीय जनसमुदाय एवं अभिभावकों का स्पष्ट मत है कि यदि ऐसा प्रेरणादायी एवं कर्तव्यनिष्ठ प्राचार्य महाविद्यालय से स्थानांतरित होता है, तो यह महाविद्यालय की प्रगति और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थानांतरण निरस्त नहीं किया गया, तो वे शांतिपूर्ण जन आंदोलन करेंगे। शासन से आग्रह किया गया है कि वह इस पूरे प्रकरण का संज्ञान ले और डॉ. प्रकाश सोलंकी का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से निरस्त करे। साथ ही, ऐसे प्रेरक शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार जैसे उच्च सम्मान के लिए नामांकित किया जाए, ताकि शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मठ शिक्षकों का मनोबल बना रहे।