भगवानपुरा। शासकीय महाविद्यालय भगवानपुरा में गुरुवार को एक भावुक क्षण उस समय देखने को मिला, जब प्रभारी प्राचार्य एवं रसायन शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. प्रकाश सोलंकी ने अपने स्थानांतरण उपरांत औपचारिक रूप से कार्यमुक्त होते हुए प्राचार्य पद का दायित्व महाविद्यालय की वरिष्ठता क्रम में अगली प्राध्यापक एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ. रजनी प्रकाश सोलंकी को सौंपा।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार, विद्यार्थीगण एवं स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति में एक संक्षिप्त विदाई समारोह आयोजित किया गया। अपने विदाई उद्बोधन में डॉ. सोलंकी ने कहा कि भगवानपुरा महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं जनसमुदाय के प्रति उनका प्रेम, प्रतिबद्धता और समर्पण सदैव बना रहेगा। उन्होंने कहा, ष्यहाँ की संस्थागत संस्कृति, विद्यार्थियों की लगन और जनसहयोग मेरे लिए अविस्मरणीय अनुभव रहे हैं।
डॉ. सोलंकी ने यह भी उल्लेख किया कि वे पूर्व में जिन महाविद्यालयों में पदस्थ रहे हैं, वहाँ भी सदैव छात्र-हित और समाज-हित को सर्वाेपरि मानकर कार्य किया है और भविष्य में भी वे अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार बने रहेंगे। उन्होंने छात्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देने वाले सभी सहयोगियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
विदाई समारोह के दौरान अनेक विद्यार्थियों ने भावुक होकर अपने अनुभव साझा किए और डॉ. सोलंकी के कार्यकाल को ‘स्वर्णिम अवधि’ की संज्ञा दी। छात्र विवेक दुबे ने कहा कि डॉ. प्रकाश सोलंकी न केवल एक कुशल प्रशासक रहे, बल्कि एक उत्कृष्ट शिक्षक और प्रेरणादायक मार्गदर्शक के रूप में भी उन्होंने अपनी विशेष पहचान बनाई। अल्प समय में उन्होंने महाविद्यालय को एक नई पहचान दी और अनुशासन, नवाचार तथा सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए। उनका स्थानांतरण निश्चित ही महाविद्यालय एवं क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। इस संबंध में जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो. सोहन गुर्जर द्वारा दी गई।