खरगोन। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ पीएस धनवाल का तबादला कर दिया गया है। वह अवंति सूत मिल घोटाले की जांच कर रहे थे। इस घोटाले में भाजपा नेताओं और अफसरों की मिलीभगत उजागर हुई थी। सेवानिवृत्ति में सिर्फ आठ महीने बाकी हैं, फिर भी उन्हें 800 किमी दूर सीधी भेजा गया है।
धनवाल ने 62.50 करोड़ रुपए के घोटाले की फाइलें दोबारा खोली थीं। उन्होंने 11 जून को तत्कालीन सीईओ राजेंद्र आचार्य को बर्खास्त किया था। इसके दो दिन बाद ही 13 जून को उनका तबादला कर दिया गया। धनवाल का कहना है कि यह तबादला ‘व्यक्तिगत द्वेष’ के कारण हुआ। जांच में 28 लोगों की भूमिका सामने आई है। इनमें दो भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। इन लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से लोन स्वीकृत किए।
पहले केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई थी। अब धनवाल की सख्ती से बड़े अफसरों पर भी सवाल उठने लगे थे। करीब ढाई महीने पहले कलेक्टर भव्या मित्तल ने लंबित फाइलों की समीक्षा की थी। उन्होंने जांच तेज करने के निर्देश दिए थे। धनवाल ने उसी के बाद कार्रवाई शुरू की थी।
बर्खास्त अफसर को फिर से सीईओ बनाने की तैयारी
अब जिन राजेंद्र आचार्य को बर्खास्त किया गया, उन्हें मंदसौर जिला सहकारी बैंक का सीईओ बनाने की तैयारी चल रही है। भोपाल से सहमति मांगी गई है। आरोप है कि प्रभारी प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता, जो तबादले के आदेश जारी करने वाले हैं, आचार्य के करीबी हैं।