उज्जैन। आशा कार्यकर्ता पुरुषों की कमर नापने के काम से शर्मिंदगी महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि काम के दौरान कई बार भद्दे कमेंट झेलने पड़ते हैं। असहज स्थिति बनती है।
दरअसल, मध्यप्रदेश में इन दिनों श्स्वस्थ यकृत मिशनश् के तहत लीवर से जुड़ी बीमारियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। इसमें आशा कार्यकर्ताओं को महिला और पुरुषों की जांच का दायित्व सौंपा है। उन्हें उम्र, वजन और ऊंचाई के साथ कमर का नाप भी लेना है।
सुदामा नगर आंगनवाड़ी केंद्र की आशा कार्यकर्ता सीमा बोलोनिया ने कहा, श्हम महिलाओं की जांच तो आसानी से कर लेते हैं, लेकिन जब कोई पुरुष आता है तो उनकी कमर का नाप लेते हुए ठीक नहीं लगता। ऐसे में पुरुष खुद इंची टेप लेकर कमर का नाप लेते हैं और हमें बता देते हैं।
बोलोनिया बताती हैं कि कई बार लोग शराब पीकर भी आ जाते हैं, जो कमर का नाप लेते हुए भद्दे कमेंट्स करते हैं। कई कमेंट ऐसे होते हैं कि किसी से बता भी नहीं सकते।
नोडल अफसर ने कहा- समझाइश दी
दैनिक भास्कर ने स्वस्थ यकृत मिशन के नोडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. आदित्य रावल से इस बारे में बात की। उन्होंने कहा- पुरुषों की कमर का नाप कैसे लें, इस बात को लेकर आशा कार्यकर्ता सीएमएचओ के पास पहुंची थीं। उन्हें समझाइश दी गई है। इसके बाद से अभी कोई शिकायत नहीं मिली है।