नीमच। वध के उद्देश्य से गौवंश का अवैध रूप से परिवहन करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि कुमार बौरासी की अदालत ने आरोपी मोहम्मद खलीक पिता मोहम्मद सलीम कुरैशी (28 वर्ष), निवासी बिहारगंज, नीमच तथा सद्दाम कुरैशी पिता नवाब कुरैशी, निवासी पिपली चौक, नीमच को दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 4/9 के अंतर्गत तीन वर्ष का कठोर कारावास एवं 5000 रुपये जुर्माना, धारा 6/9 के अंतर्गत एक वर्ष का कठोर कारावास एवं 5000 रुपये जुर्माना, तथा मध्यप्रदेश कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 1959 की धारा 6(ख)(2) के अंतर्गत एक वर्ष का कठोर कारावास एवं 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सात वर्ष पुरानी घटना
प्रकरण से जुड़ी जानकारी देते हुए शासन की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक (एडीपीओ) रितेश कुमार सोमपुरा ने बताया कि यह घटना 3 मार्च 2018 की है। उस दिन शाम करीब 6रू30 बजे मंदसौर-नीमच फोरलेन स्थित सगरग्राम पुलिया के पास एक पिकअप वाहन सड़क पर क्षतिग्रस्त अवस्था में खड़ा मिला, जिसमें 6 केड़े (बैल) ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे। वाहन का पिछला पहिया निकल गया था, जिससे वाहन वहीं रुक गया।
आरक्षक विकास और आरक्षक राजेंद्र सिंह द्वारा सूचना मिलने पर उपनिरीक्षक पन्नालाल दायमा मौके पर पहुंचे और देखा कि आमजन ने वाहन चालक एवं उसके साथी को पकड़ रखा था। पूछताछ में पता चला कि यह केड़े वध हेतु महाराष्ट्र ले जाए जा रहे थे। मौके से वाहन व पशुओं को जब्त किया गया तथा आरोपियों को गिरफ्तार कर जीरन थाने में अपराध दर्ज किया गया।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि केड़ों के परिवहन हेतु आरोपियों के पास कोई वैध अनुमति या लाइसेंस नहीं था। वाहन के स्वामी मोहम्मद खलीक को भी मामले में आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया और समस्त साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
एक आरोपी फरार, दो को सजा-
विचारण के दौरान आरोपी मोहम्मद रफीक फरार हो गया, इसलिए उसके विरुद्ध निर्णय नहीं दिया जा सका। शेष दोनों आरोपियों मोहम्मद खलीक एवं सद्दाम कुरैशी के विरुद्ध अभियोजन पक्ष ने पंच साक्षी, विवेचक सहित सभी महत्वपूर्ण गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए और अपराध को संदेह से परे प्रमाणित किया। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर दंड से दंडित किया। प्रकरण में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा द्वारा की गई।