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June 18, 2025, 5:06 pm
KHABAR : 33 सिकल सेल प्रभावित जिलों में विशेष शिविर, उपमुख्यमंत्री बोले-कुंडली मिले या न मिले, सिकल सेल कार्ड जरूर मिलाएं, पढे़ खबर 

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भोपाल। विश्व सिकल सेल दिवस यानी 19 जून को राज्य के 33 सिकल सेल प्रभावित जिलों में विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य सिकल सेल रोग के उन्मूलन के प्रयासों को सशक्त करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिकल सेल मुक्त भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।


उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कुंडली मिले या न मिले, शादी से पहले सिकल सेल कार्ड जरूर मिलाएं। उन्होंने समझाया कि यदि दोनों युवा सिकल सेल वाहक होते हैं, तो उनके बच्चों में गंभीर सिकल सेल रोग होने की संभावना बहुत अधिक होती है। सिकल सेल एक आनुवांशिक और असाध्य रक्त विकार है। जो पीढ़ी दर पीढ़ी फैलता है। इस रोग में लाल रक्त कणिकाएं अर्द्ध चंद्राकार हो जाती है। जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को तीव्र दर्द, बार-बार संक्रमण और अंगों को क्षति जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह रोग विशेष रूप से जनजातीय समुदायों में अधिक पाया जाता है। मध्यप्रदेश जैसे जनजातीय बाहुल्य राज्य के लिए यह एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।


राज्य स्तरीय समारोह बड़वानी में
विश्व सिकल सेल दिवस पर राज्य स्तरीय समारोह 19 जून को बड़वानी में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। इस अवसर पर प्रदेश के 33 सिकल प्रभावित जिलों में परामर्श, स्क्रीनिंग, रोग प्रबंधन और मुफ्त उपचार के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे।


1 करोड़ 6 लाख नागरिकों की हुई स्क्रीनिंग
सिकल सेल स्क्रीनिंग में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। अब तक 1 करोड़ 6 लाख से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 2 लाख से अधिक सिकल सेल वाहक और 29,277 रोगी चिह्नित किए गए हैं। 80 लाख 9 हजार से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। 26,115 मरीजों को हाइड्रोक्सी यूरिया दवा से उपचार उपलब्ध कराया गया है।


प्रदेश में इलाज की सुविधा
उपमुख्यमंत्री शुक्ल के अनुसार, सभी चिह्नित रोगियों को दवा, टीकाकरण, रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) और जेनेटिक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। एम्स भोपाल में नवजातों की 72 घंटे में जांच के लिए एक विशेष लैब कार्यरत है। इंदौर मेडिकल कॉलेज में 100 से अधिक बोनमेरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए गए हैं। रीवा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर प्रीनैटल डायग्नोसिस ऑफ हिमोग्लोबिनोपैथीज भी प्रभावी रूप से कार्यशील है।

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