इंदौर। इंदौर से मुंबई जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-3 (एबी रोड) पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं के मद्देनज़र बाकानेर घाट के साइड से बनाए गए वैकल्पिक मार्ग की खस्ता हालत को लेकर मामला अब उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ तक पहुँच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की द्विसदस्यीय पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन को इस मामले में उपयुक्त कार्यवाही कर 15 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
106 करोड़ की लागत से बनी 8.8 किमी सड़क 6 माह में गड्ढों में तब्दील-
जानकारी के अनुसार, एनएचएआई द्वारा 106 करोड़ रुपये की लागत से बाकानेर घाट के समानांतर 8.8 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था। निर्माण के केवल छह माह बाद ही बारिश के दौरान यह सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई, जिससे वाहन चालकों और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लगातार हादसे, 15 साल में 3 हजार दुर्घटनाएँ – 450 से अधिक मौतें
याचिकाकर्ता के अनुसार, राऊ–खलघाट सेक्शन (77 किमी) पर बीओटी योजना के तहत वर्ष 2009 में टोल वसूली प्रारंभ हुई थी। इस मार्ग के भेरू घाट और बाकानेर घाट के लगभग 9 किमी हिस्से में तकनीकी खामी के कारण 6 मीटर प्रति 100 मीटर की ढलान रखी गई, जिससे वाहनों के ब्रेक फेल होना, क्लच प्लेट जलना और नियंत्रण बिगड़ना आम बात बन गई।
वर्ष 2009 से 2024 तक लगभग 3,000 से अधिक हादसों में 450 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की पुष्टि हुई है।
-हाल ही में 24 वर्षीय युवक की हादसे में मौत-
15 सितम्बर की रात गड्ढों से बचने के प्रयास में एक कार डंपर से टकरा गई, जिससे खरगोन निवासी 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई और दो साथी गंभीर रूप से घायल हुए। इससे पहले भी कई दिल दहलाने वाली घटनाएँ इसी हिस्से में घट चुकी हैं।
एनएचएआई और कंपनी की लापरवाही पर सवाल-
मार्ग का निर्माण हरियाणा की कंपनी द्वारा जून 2023 में शुरू किया गया था और 30 नवम्बर 2024 को आवागमन के लिए खोला गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्माण कार्य मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया गया और विभागीय अधिकारी केवल प्रतीकात्मक मरम्मत कर मामले को नजरअंदाज करते रहे।
19 हजार वाहनों का रोजाना आवागमन फिर भी समाधान नहीं-
इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 19,000 वाहन गुजरते हैं और टोल शुल्क चुकाते हैं, फिर भी केंद्र सरकार और विभागीय एजेंसियों ने इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया।
केंद्र सरकार को भी भेजी गई शिकायतें-
प्रधानमंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, और मंत्रालय के सचिव को प्रमाणों सहित शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन समाधान न होने पर मामला उच्च न्यायालय में जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत किया गया। अब न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट 15 दिसंबर तक प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।