नीमच। मध्यप्रदेश पुलिस का विशेष अभियान ऑपरेशन मुस्कान लगातार परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लौटा रहा है। वर्षों से लापता बच्चों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पुलिस अधीक्षक नीमच अंकित जायसवाल के निर्देशन में विशेष टीम ने 17 वर्ष से अधिक समय से लापता किशोरी को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया। इस सफलता पर एसपी द्वारा 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पांच वर्षों में 97 प्रतिशत नाबालिगों की सुरक्षित दस्तयाबी-
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, भोपाल द्वारा 01 नवंबर से 30 नवंबर 2025 तक पूरे प्रदेश में विशेष ऑपरेशन मुस्कान अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत नीमच पुलिस ने पिछले पाँच वर्षों में 97 प्रतिशत से अधिक अपहृत एवं गुमशुदा नाबालिग बालकदृबालिकाओं को सकुशल दस्तयाब करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
नीमच पुलिस का सतत प्रयास-
एसपी जायसवाल के नेतृत्व में नाबालिगों के अपहरण या गुमशुदगी के मामलों को पूरी गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीमों को लगातार सक्रिय रखा गया है। सायबर सेल और मुखबिर तंत्र की मदद, तकनीकी संसाधनों का विश्लेषण, संभावित स्थानों पर लगातार दबिश, विभिन्न जिलों में जानकारी जुटाना इन्हीं प्रयासों के चलते कई वर्षों पुराने मामलों में भी सफलता मिल रही है।
2008 से लापता किशोरी 17 साल बाद मिली सुरक्षित
थाना जावद क्षेत्र की 16 वर्षीय एक नाबालिग किशोरी 24 अप्रैल 2008 को लापता हो गई थी। परिजनों द्वारा 26 अप्रैल 2008 को प्रकरण दर्ज कराया गया था। बाद में मामला धारा 363 भादवि के तहत अपराध क्रमांक 348/2013 में पंजीबद्ध किया गया। पुलिस द्वारा वर्षों तक लगातार विभिन्न स्थानों पर तलाश की गई, पर किशोरी का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। इस महत्वपूर्ण मामले में एसपी नीमच द्वारा 10,000 रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई थी।
विशेष टीम ने राजस्थान से किया दस्तयाब-
अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जावद रोहित राठौर के नेतृत्व में पुलिस चौकी नयागांव, सायबर सेल की विशेष टीम का गठन किया गया।
तकनीकी विश्लेषण और लगातार सूचना संकलन के आधार पर पता चला कि किशोरी राजस्थान के राजसमंद जिले में देखी गई है। पुलिस टीम ने संभावित स्थलों पर सघन खोजबीन की और अंततः ग्राम सिन्देरसर कला, थाना रेलमगरा जिला राजसमंद से किशोरी को सुरक्षित दस्तयाब कर लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर किशोरी को परिजनों को सौंप दिया गया। लंबे अंतराल के बाद बेटी की सुरक्षित घर वापसी से परिवार की आंखों में खुशी के आँसू छलक पड़े।
इन अधिकारियों का रहा सराहनीय योगदान-
रोहित राठौर, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जावद, सउनि सुरेश कटारिया, प्रधान आरक्षक कन्हैयालाल राठौर, प्रधान आरक्षक प्रदीप शिंदे (प्रभारी सायबर सेल), सायबर सेल एवं एसडीओपी कार्यालय का पूरा स्टाफ।