मंदसौर। गांधीसागर टाइगर रिजर्व ने एक और अनोखी पहचान हासिल कर ली है। यहां वन विभाग ने बैंगलुरू की वाइल्ड टेल्स एजेंसी के सहयोग से ऐसा बटरफ्लाई-शेप्ड गार्डन विकसित किया है, जो आसमान से बिल्कुल पंख फैलाए तितली की आकृति जैसा नजर आता है। कुछ ही समय में यह गार्डन प्रकृति प्रेमियों, स्कूलों के बच्चों और फोटोग्राफर्स के लिए नया आकर्षण बन गया है।
12,000 वर्ग फीट में फैले इस गार्डन में 60 से अधिक होस्ट और नेक्टर प्लांट्स लगाए गए हैं, जिनमें नींबू, करी पत्ता, कैलोट्रोपिस और अरिस्टोलोचिया जैसे पौधे शामिल हैं। इन पौधों ने तितलियों की अनेक दुर्लभ और रंगीन प्रजातियों को आकर्षित करना शुरू कर दिया है। रोजाना कॉमन लेपर्ड, लाइम, प्लेन टाइगर, ब्लू टाइगर जैसी कई तितलियां यहां दिखाई दे रही हैं।
पूरा इको-सिस्टम विकसित हो रहा-
यह गार्डन सिर्फ सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि एक विकसित होता हुआ मिनी इको-सिस्टम बन चुका है। तितलियों के साथ कैटरपिलर्स, कई प्रकार के पक्षी और छोटे जीव भी बड़ी संख्या में यहां आने लगे हैं। रिज़र्व के प्रमुख नेचुरलिस्ट नितेश चनाल प्रतिदिन बच्चों और पर्यटकों के लिए ‘बटरफ्लाई वॉक’ का आयोजन करते हैं, जहां आगंतुक तितली के जन्म से लेकर उड़ान तक पूरे जीवन चक्र को करीब से देख पाते हैं। लार्वा द्वारा पत्तियां चबाना, धीरे-धीरे मोटा होना, प्यूपा बनकर कोकून में बदलना और फिर 10-15 दिन बाद रंग-बिरंगी तितली के रूप में बाहर निकलकर उड़ जानाकृयह पूरा रोमांचक सफर लोग अब अपनी आंखों के सामने अनुभव कर रहे हैं।