प्रतापगढ़। जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशा कुमारी ने एक बहुचर्चित हत्या प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी राजमल पुत्र छगनलाल मीणा, निवासी केसरपुरा, थाना रठांजना को आजीवन कारावास तथा 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य व गवाहियों के आधार पर अपराध सिद्ध होता है।
लोक अभियोजक तरूणदास वैरागी के अनुसार घटना 7 नवंबर 2024 की है। प्रार्थी शांतिलाल ने रिपोर्ट में बताया कि वह और उसका भाई मजदूरी पर गए थे, जबकि उनके पिता मोहनलाल घर के बाहर आंगन में सो रहे थे। सुबह लगभग 7 बजे मनोहरलाल उन्हें जगाने आया तो उसने देखा कि मोहनलाल के मुंह से खून बह रहा था और सिर पर गंभीर चोटें थीं। उसने तुरंत घटना की सूचना परिजनों को दी।
परिजन जब मौके पर पहुंचे तो पड़ोसी राजमल अपने घर के बाहर खून लगे लठ के साथ बैठा मिला और धमकी दे रहा थाकृ“मोहनलाल का जो हाल हुआ है, उधर आए तो तुम्हारा भी यही अंजाम होगा।” ग्रामीणों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह जंगल की ओर भाग गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना रठांजना पुलिस ने धारा 103(1) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया। तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी दीपक कुमार मेघवाल द्वारा की गई जांच के बाद चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोग पक्ष ने मामले को सिद्ध करने के लिए 22 गवाहों के बयान और 27 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। राज्य की ओर से प्रकरण की प्रभावी पैरवी लोक अभियोजक तरूणदास वैरागी ने की।