भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रही आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के प्रभावी परिणाम सामने आ रहे हैं। रविवार को मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 10 हार्डकोर, सशस्त्र और वर्दीधारी नक्सलियों ने AK-47, इंसास, SLR सहित अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर संविधान पर विश्वास जताया। इन सभी पर कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
मुख्यमंत्री ने इसे नक्सलवाद के अंत की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के सहयोग की सराहना की।
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने बताया कि लगातार मिल रहे सरकारी सहयोग, सटीक इंटेलिजेंस और संयुक्त अभियानों के कारण नक्सली गतिविधियाँ तेजी से सिमट रही हैं। हॉक फोर्स, जिला पुलिस, CRPF, कोबरा एवं स्थानीय प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से मंडला–बालाघाट क्षेत्र लगभग सशस्त्र नक्सलियों से मुक्त हो चुका है।
पहले भी कई बड़े समर्पण
1 नवंबर 2025 को भी एमएमसी जोन की 14 लाख की इनामी सशस्त्र महिला नक्सली सुनीता ओयाम ने आत्मसमर्पण किया था। वहीं हाल के महीनों में MMC जोन के 17 नक्सली महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों ने बालाघाट जोन में 10 हार्डकोर नक्सलियों का एनकाउंटर किया, जिन पर 1 करोड़ 86 लाख का इनाम था।
शासन की पहुंच बढ़ी
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 46 एकल सुविधा केंद्रों के माध्यम से 2,046 वनाधिकार दावे, 1,232 जाति प्रमाण पत्र तथा 748 आधार अपडेट/वितरण किए गए। रोजगार मेलों से युवाओं को निजी कंपनियों में नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
ये 10 नक्सली हुए आत्मसमर्पित
सुरेंद्र उर्फ कबीर (62 लाख), राकेश ओडी (62 लाख), समर उर्फ समारू (14 लाख), सलीता (14 लाख), विक्रम (14 लाख), लालसिंह मरावी (14 लाख), शिल्पा (14 लाख), जरीना (14 लाख), जयशीला (14 लाख), नवीन नुप्पो (14 लाख)।
सभी भोरमदेव एरिया कमेटी से जुड़े थे।
पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में जारी सतत अभियानों एवं आउटरीच कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप नक्सली मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। पुलिस ने आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास नीति-2023 के सभी लाभ दिलाने का भरोसा दिया है।