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December 11, 2025, 10:30 am
KHABAR : थाना प्रभारी बैरागी की दहशत में एक गरीब किसान का परिवार थाने में अवैध हिरासत, ₹1 लाख की जबरन उगाही और लगातार धमकियों के आरोप मानवाधिकार आयोग व आईजी तक पहुंची शिकायत, पढे़ अर्पित बोड़ाना की खबर 

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शाजापुर। जिले के अवंतीपुर बड़ोदिया थाने से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ग्राम मुबारिकपुर चिराटिया के गरीब किसान-ड्राइवर दिनेश पिता अमर सिंह ने मानव अधिकार आयोग और आईजी उज्जैन को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी घनश्याम बैरागी व उनके स्टाफ ने उन्हें 30 जुलाई 2025 को अवैध रूप से उठा कर कई घंटों तक थाने में बंद रखा, झूठे चोरी के केस में फँसाने की धमकी दी और रात 11 से 12 बजे के बीच ₹1,00,000 की जबरन वसूली की। दिनेश का कहना है कि वह पूरे परिवारकृवृद्ध माता-पिता, पत्नी और छोटे बच्चोंकृका अकेला सहारा है, लेकिन पिछले कई महीनों से थाना प्रभारी और उसके स्टाफ की धमकियों, गालियों, पैसों की मांग और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन ने पूरे परिवार को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। शिकायत के अनुसार 30 जुलाई को शाम 5-6 बजे पुलिसकर्मी राजेश जाट, कमलेश, रवि और एक अन्य जवान गांव पहुंचे और किसी भी अपराध, नोटिस या वैधानिक प्रक्रिया के बिना दिनेश को उठा कर थाने ले गए। थाने में घंटों बिठाकर उन्हें बार-बार धमकाया गयाकृ“अभी चोरी के केस में फंसा देंगे, जेल में सड़ा देंगे, जिंदगी बर्बाद कर देंगे।” देर रात पैसे की मांग खुलकर शुरू हुई और दबाव इतना था कि मजबूरी में रात 12 -’1 बजे उन्हें छोड़ा गया, लेकिन उनका मोबाइल जब्त कर लिया गया, जिसे चार दिन बाद उनके रिश्तेदारों रामस्वरूप और भगवान सिंह के हाथों वापस करवाया गया। दिनेश ने मांग की है कि 30 जुलाई तथा मोबाइल वापसी वाले दिन की पूरी ब्ब्ज्ट फुटेज तुरंत सुरक्षित करवाई जाए। इसके अगले दिन 31 जुलाई को उनके मामा का लड़का रामस्वरूप पिता प्यारे लाल ग्राम बेगमखेड़ी से पुलिसकर्मी राजेश जाट को ₹1,00,000 नकद देकर आया, जो दिनेश के अनुसार “थाना प्रभारी को देने के लिए” लिया गया। दिनेश का कहना है कि अत्याचार यहीं नहीं रुका थाना प्रभारी और स्टाफ लगातार फोन कर गालियां देते हैं, धमकाते हैं, रिश्तेदारों पर दबाव बनाते हैं कि “दिनेश को पकड़कर लाओ नहीं तो बुरा होगा।” उनके चचेरे भाई धन सिंह पिता प्रभुलाल को भी बार-बार धमकाया गया। यह सब न केवल पुलिस अधिनियम का, बल्कि मानवाधिकारों और संविधान का सीधा उल्लंघन है। शिकायत में लिखे अनुसार उनकी पत्नी मानसिक रूप से टूट चुकी है, बच्चे डर के कारण रात-रात भर सो नहीं पाते, वृद्ध माता-पिता का इलाज बंद होने से हालत खराब है, खेती और ड्राइवरी दोनों काम बंद पड़े हैं और दिनेश खुद कई दिनों से जान बचाकर गांव से बाहर भटक रहा है। घर में रोज़ी-रोटी तक का संकट खड़ा हो चुका है। दिनेश का कहना है-“यदि अब भी न्याय नहीं मिला तो मैं आत्मदाह जैसे कदम उठाने की स्थिति में पहुंच चुका हूं, और मेरी किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी थाना प्रभारी घनश्याम बैरागी व उसका स्टाफ होगा। दिनेश ने स्वीकार किया कि भय के कारण उन्होंने पहले ₹1,00,000 दे दिए, लेकिन अब धमकियों का दौर फिर से शुरू हो गया है, इसलिए वह परिवार सहित उच्च अधिकारियों की शरण में आए हैं। उन्होंने मानव अधिकार आयोग, आईजी उज्जैन, गृह विभाग और मुख्यमंत्री को भेजे आवेदन में मांग की है कि थाना प्रभारी और दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की जाए, तत्काल निलंबन हो, पूरे मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच हो, परिवार को सुरक्षा दी जाए, वसूले गए ₹1,00,000 वापस दिलवाए जाएं, मानसिक-सामाजिक क्षति का मुआवजा मिले, भविष्य में किसी भी झूठी कार्रवाई से सुरक्षा का आदेश जारी हो और 30 जुलाई सहित जनवरी से अब तक की थाने की सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, एंट्री रजिस्टर आदि जांच में शामिल कि। 

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