चित्तौड़गढ़। सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में विजय दिवस की 55वीं वर्षगांठ आगामी 16 दिसंबर 2025 को अत्यंत गरिमा, गौरव एवं राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाई जाएगी। यह दिवस भारतीय सशस्त्र बलों की अद्वितीय वीरता, शौर्य एवं बलिदान को समर्पित रहेगा।
कार्यक्रम में राजस्थान के माननीय शिक्षा मंत्री मदन दिलावर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जबकि भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
विजय दिवस समारोह की सभी तैयारियां सैनिक स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया एवं उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन एवं सतत निगरानी में अंतिम चरण में हैं।
यह आयोजन उन वीर सैनिकों एवं भूतपूर्व सैनिकों के सम्मान में आयोजित किया जा रहा है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दी तथा देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की। यह दिवस 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक है, जब भारतीय सेना के शौर्य के समक्ष पाकिस्तान की सेनाओं ने ढाका में आत्मसमर्पण किया था। यह विजय भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
विद्यालय द्वारा तैयार कार्यक्रम रूपरेखा के अंतर्गत भव्य परेड, श्रद्धांजलि समारोह, देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं प्रेरणादायी उद्बोधन आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का केंद्रबिंदु सैन्य गौरव, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा एवं राष्ट्रप्रेम की भावना रहेगा, जिससे कैडेट्स में नेतृत्व क्षमता और देशसेवा के प्रति समर्पण और अधिक सुदृढ़ हो सके।
विद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा भूतपूर्व सैनिकों एवं विद्यालय के कर्मचारियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही विद्यालय परिसर में नव-निर्मित पेरेंट्स हॉल, आधुनिक एयर राइफल शूटिंग रेंज एवं तीरंदाजी रेंज का उद्घाटन भी किया जाएगा, जिससे कैडेट्स के सर्वांगीण विकास एवं खेल प्रशिक्षण को नई दिशा मिलेगी।
इसके अतिरिक्त मुख्य अतिथि द्वारा कैडेट्स हॉस्टल एवं गर्ल्स हॉस्टल का निरीक्षण किया जाएगा तथा कैडेट्स से संवाद कर उन्हें अनुशासन, समर्पण एवं राष्ट्रसेवा के मूल्यों के प्रति प्रेरित किया जाएगा।
सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का यह विजय दिवस समारोह न केवल वीर सैनिकों एवं भूतपूर्व सैनिकों के सम्मान का सशक्त मंच बनेगा, बल्कि विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं समाज में देशभक्ति, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक मजबूत करेगा। विजय दिवस आज राष्ट्र की सैन्य शक्ति, आत्मसम्मान एवं गौरव का जीवंत प्रतीक बन चुका है।