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January 4, 2026, 4:26 pm
KHABAR : नीमच में पहली बार एशियन वाटर बर्ड सेंसस, प्रवासी और दुर्लभ जलीय पक्षियों की गणना संपन्न, ग्रेट व्हाइट पेलिकन, कॉमन टील और डिशेल डक की उपस्थिति दर्ज, सिटीजन साइंस को बढ़ावा, पढ़े खबर

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नीमच। जल स्रोतों और जलीय पक्षियों के संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश में पहली बार एशियन वाटर बर्ड सेंसस (AWC) का आयोजन नीमच में किया गया। 3 और 4 जनवरी को वन विभाग और नीमच बर्ड्स ग्रुप के संयुक्त प्रयास से जिले के प्रमुख जलाशयों और वेटलैंड्स में पक्षियों का सर्वेक्षण और गणना कार्य संपन्न हुआ।

वन मंडल अधिकारी एसके अटोदे के निर्देशन में और एसडीओ फॉरेस्ट नोडल ऑफिसर दशरथ अखंड के नेतृत्व में यह कार्यक्रम सिटीजन साइंस को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया। नीमच बर्ड्स ग्रुप के पक्षी विज्ञानी डॉ. साधना सेवक, इंद्रजीत सिंह, निकिता यादव, अनमोल यादव, अक्षय यति, अजय धाकड़, अंजली शर्मा ने नेतृत्व किया। जाजू कॉलेज और पीजी कॉलेज के वॉलिंटियर्स ने भी पहली बार इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।

सर्वेक्षण में विशेष रूप से प्रवासी और दुर्लभ पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिनमें ग्रेट व्हाइट पेलिकन, कॉमन टील, रूडिशेल डक, ओरिएंटल डार्टर, कोरमोरेंट इग्रेट, पॉन्ड हरॉन, पर्पल और ग्रे हेरॉन, लेसर विसलिंग डक, यूरेशियन कूट, नॉब-बिल्ड डक, स्टिल्ट, रिवर टर्न, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, ग्रीब, आईबीस, स्वंप हेन और स्टॉर्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हमस वारब्लर, रेड-ब्रेस्टेड फ्लाइकेचर, साइबेरिया स्टोनचैट, सारस क्रेन, एशियाई बॉर्न आउल, स्पॉटेड आउल, टाउनी पीपीट और वैगटेल जैसी प्रजातियां भी देखी गई।

सर्वेक्षण 3 जनवरी को शहर के प्रमुख वेटलैंड्स- हमीरिया तालाब, शिवाजी सागर डेम, ठीकरिया तालाब, जीरन-हरबार तालाब, हरकीया खाल डेम और चैनपुरा डेम में किया गया। 4 जनवरी को आंतरिक और दूरस्थ जलाशयों—किरता तालाब, लासूर बांध, श्रीपुरा, कनपुरिया तालाब, जावी तालाब और अमरतीया तालाब में गणना की गई। अमरतीया तालाब में 35 प्रजातियों का निरीक्षण किया गया, जबकि लासूर बांध पर 43 प्रजातियां पाई गईं।

नीमच बर्ड्स की डॉ. साधना सेवक ने वन विभाग के अधिकारियों, रेंजर्स और सहयोगियों के पूर्ण सहयोग पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पक्षियों की पहचान और eBird ऐप में डेटा संधारण के माध्यम से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस ऐतिहासिक आयोजन से नीमच में जलीय पक्षियों के संरक्षण, सिटीजन साइंस और पर्यावरण जागरूकता को बल मिला है।

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