सेगांव। पिछले दिनों इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद पूरे प्रदेश का सिस्टम हिल गया, अफसर एक्टिव मोड पर आ गए, मीटिंगों की बरसात होने लगी। लेकिन इन्हीं अफ़सरों की नज़र के बावजूद खरगोन जिले की ग्राम पंचायत सेगांव में आज भी नल से जहर ही बह रहा है। कई वार्डों में पाइप लाइन से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है, जिससे ग्रामीणों की जान रोज़ दांव पर लगी है, लेकिन जिम्मेदार अफसर मानो कुंभकर्णी नींद से जागने का नाम ही नहीं ले रहे।कुछ साल पहले सेगांव में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपए की लागत से नई पाइप लाइन बिछाई गई थी। कागज़ों में तो हर घर तक शुद्ध पानी पहुँचाने का सपना दिखाया गया, लेकिन ज़मीन पर हकीकत ये है कि केंद्र की यह महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। करोड़ों की पाइप लाइन के बावजूद आज भी सेगांव के लोग बूंद-बूंद साफ पानी के लिए तरस रहे हैं।
लीकेज ऐसी कि जहर सीधे घर तक
ग्राम पंचायत सेगांव में जल जीवन मिशन के तहत बिछी नई पाइप लाइन में जगह-जगह बड़े लीकेज हैं। इन लीकेज के कारण गंदगी, सीवर और नाली का पानी सीधे पेयजल लाइन में घुस रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बाद भी लीकेज पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, टेप, कपड़ा, लोकल जुगाड़ से काम चला दिया जाता है, लेकिन समस्या की जड़ को कोई नहीं छूता।नगर के कई वार्डों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि नलों से पीला, बदरंग और बदबूदार पानी आ रहा है। इसी दूषित पानी से उल्टी-दस्त, पेट दर्द और संक्रमण के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सेगांव की जूनी कचहरी क्षेत्र में तो हालात इतने खराब हैं कि उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों का लगातार इलाज चल रहा है।बिना टेस्टिंग के हैंडओवर, पंचों ने उठाए गंभीर सवालग्राम पंचायत से जुड़े कुछ पंचों ने योजना के काम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत घटिया क्वालिटी की पाइप, कमजोर सबमर्सिबल पंप और निम्नस्तरीय मटेरियल का इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद न तो सही टेस्टिंग हुई, न ही तकनीकी जांच, फिर भी मोटी रकम लेकर पूरे काम को हैंडओवर कर दिया गया। स्थानीय पंचों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और विभागीय जिम्मेदारों की मिलीभगत से करोड़ों की योजना को लूट का जरिया बना दिया गया। पंचों का कहना है कि लाखों रुपये की बंदरबांट के बदले घटिया काम पर आंख मूंद ली गई और आज उसकी कीमत पूरा सेगांव दूषित पानी पीकर चुका रहा है।
दिल्ली से इंदौर तक गुहार, लेकिन फाइलों में ही दफन जांच
ग्रामीणों ने सेगांव की पानी समस्या को लेकर दिल्ली, भोपाल, इंदौर और खरगोन तक कई बार लिखित शिकायतें भेजीं। इंदौर से आला अधिकारी भी मौके पर जांच के लिए पहुंचे थे। कागज़ों में टीम आई, निरीक्षण हुआ, फोटो खिंचे, रिपोर्ट बनी दृ लेकिन न तो कोई बड़ा खुलासा हुआ, न दोषियों पर कार्रवाई, न ही समस्या का स्थायी समाधान।
गांव के लोगों का कहना है कि हर बार आश्वासन मिल जाता है दृ “जल्द सुधार होगा, व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी” दृ लेकिन हकीकत ये है कि नलों से अभी भी दूषित पानी ही बह रहा है। प्रशासन की निष्क्रियता ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है।जिम्मेदारों की चुप्पी, ग्रामीणों की मजबूरीसेगांव के लोग रोज़ सुबह नल खोलते हैं तो उन्हें साफ पानी नहीं, बीमारी का डर दिखाई देता है। बोतल का पानी खरीदने की मजबूरी हो, हैंडपंप के चक्कर हों या पुराने कुओं पर निर्भरता दृ ग्रामीण हर रोज़ अपनी सुरक्षा का इंतज़ाम खुद कर रहे हैं, जबकि कागज़ों में तो हर घर नल से शुद्ध पानी पहुंच चुका है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इंदौर जैसी बड़ी घटना के बाद भी सिस्टम नहीं जाग रहा, तो और कितनी बड़ी त्रासदी का इंतजार है?
क्या सेगांव के लोगों की जान की कीमत सिर्फ फाइलों में लगी मुहर और टेंडर की राशियों तक ही सीमित है?
सेगांव के ग्रामीण आज सिर्फ एक मांग कर रहे हैं दृ
दूषित पानी की सप्लाई तुरंत रोकी जाए, पूरी पाइप लाइन की तकनीकी जांच हो, लीकेज को स्थायी रूप से ठीक किया जाए और जल जीवन मिशन के भ्रष्टाचार में शामिल जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।