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January 8, 2026, 10:30 am
NEWS : हिन्दुस्तान जिंक और सिलॉक्स इंडिया ने इकोजे़न के साथ लो-कार्बन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पार्टनरशिप को किया मजबूत, पढे़ रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड और प्रमुख स्पेशलिटी केमिकल्स मैन्युफैक्चरर सिलॉक्स इंडिया ने सिलॉक्स इंडिया द्वारा हिन्दुस्तान जिंक के लो-कार्बन जिंक ब्रांड, इकोजे़न को अपने मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस में अपनाने के माध्यम से अपनी लंबे समय से चली आ रही पार्टनरशिप को मजबूत करने की घोषणा की है। यह सहयोग भारत की इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन में लो-कार्बन तरीकों को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है और डाउनस्ट्रीम डीकार्बनाइजेशन को सक्षम करने में अपस्ट्रीम प्रोड्यूसर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करता है। इकोजे़न को इंटीग्रेट कर, सिलॉक्स इंडिया अपने जिंक-आधारित केमिकल प्रोडक्ट्स के एम्बेडेड कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा, वहीं अपने ग्लोबल कस्टमर्स द्वारा अपेक्षित परफॉर्मेंस और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करना जारी रखेगा।


इकोजे़न एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक है जो पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग से बनाया गया है, जिसका वेरिफाइड कार्बन फुटप्रिंट प्रति टन जिंक पर एक टन कार्बन उत्सर्जन से कम है - जो ग्लोबल इंडस्ट्री एवरेज से लगभग 75 प्रतिशत कम है। अपने लो-एमिशन प्रोफाइल के अलावा, इकोजे़न पूरी ट्रेसेबिलिटी और थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन प्रदान करता है, जिससे कस्टमर्स अपने मटेरियल इनपुट के पर्यावरणीय प्रभाव का पारदर्शी रूप से हिसाब रख सकते हैं। गैल्वनाइजिंग जैसे डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशंस में, पारंपरिक जिंक की तुलना में इकोजे़न के उपयोग से प्रति टन स्टील पर लगभग 400 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन से बचा जा सकता है।


वेदांता ग्रुप की कंपनी हिन्दुस्तान जिंक, भारत के मेटल्स इकोसिस्टम में एक अहम भूमिका निभाती है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव और पावर से लेकर केमिकल्स और रिन्यूएबल्स जैसे सेक्टर्स को जिंक और उससे जुड़े मटीरियल सप्लाई करती है। अपनी सस्टेनेबिलिटी स्ट्रेटेजी के तहत, कंपनी ने न सिर्फ अपने ऑपरेशंस में बल्कि कस्टमर वैल्यू चेन में भी एमिशन कम करने को प्राथमिकता दी है। इकोजे़न इस हेतु मुख्य स्तंभ बनकर उभरा है, जो कस्टमर्स को स्कोप 3 एमिशन कम करने के टारगेट पूरे करने में सहायता करता है। हिन्दुस्तान जिं़क इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स का भी सदस्य है, जो जिम्मेदार माइनिंग, क्लाइमेट एक्शन और ट्रांसपेरेंट वैल्यू चेन में ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के साथ इसके तालमेल को दर्शाता है।


सिलॉक्स इंडिया केमिकल एप्लीकेशन सेगमेंट में हिन्दुस्तान जिं़क के प्रमुख कस्टमर्स में से एक है। यह कंपनी इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री और नॉन-फेरस मेटल डेरिवेटिव्स के निर्माण में प्रमुख है, जो कई प्रकार के इंडस्ट्रियल सेक्टर्स को एप्लीकेशन-स्पेसिफिक सॉल्यूशन सप्लाई करती है। इकोजे़न को शामिल करना सिलॉक्स इंडिया के ईएसजी उद्देश्यों के अनुरूप है, क्योंकि यह जिंक-आधारित प्रोडक्ट्स के कार्बन फुटप्रिंट को कम करता है और इसकी सप्लाई चेन की सस्टेनेबिलिटी क्रेडेंशियल को मजबूत करता है।


हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ और होल-टाइम डायरेक्टर अरुण मिश्रा ने कहा कि, “हिन्दुस्तान जिंक में डीकार्बनाइजेशन सिर्फ हमारे अपने ऑपरेशंस तक ही सीमित नहीं है, यह इसके आगे यह भी महत्व रखता है कि हमारे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल अलग-अलग इंडस्ट्रीज में कैसे किया जाता है। इकोजे़न इस बात में एक बड़ा बदलाव है कि जिंक कैसे क्लीनर मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट कर सकता है। सिलॉक्स इंडिया जैसे कस्टमर्स के साथ पार्टनरशिप कर, हम बड़े पैमाने पर लो-कार्बन सॉल्यूशंस को अपनाने में मदद कर रहे हैं।”


सिलॉक्स इंडिसा के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश रमन ने कहा कि यह कोलैबोरेशन कंपनी के लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी रोडमैप को सपोर्ट करता है। “इकोजे़न को अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में इंटीग्रेट करने से हम अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में एम्बेडेड एमिशन को कम कर पाते हैं, साथ ही अपने कस्टमर्स को हाई-परफॉर्मेंस सॉल्यूशंस देना जारी रखते हैं। यह पार्टनरशिप दिखाती है कि अपस्ट्रीम इनोवेशन कैसे डाउनस्ट्रीम में सस्टेनेबिलिटी के नतीजों को तेज कर सकता है।”


इकोजेन जिंक की ड्यूरेबिलिटी और लंबी सर्विस लाइफ को प्रोडक्शन स्टेज पर काफी कम कार्बन फुटप्रिंट के साथ जोड़ता है, जिससे पूरी वैल्यू चेन में कुल मिलाकर पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने में सहायक है। लगातार परफॉर्मेंस और क्वालिटी के साथ-साथ कम एमिशन देकर, इकोजेन इंडस्ट्रियल कस्टमर्स के लिए ज्यादा सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग तरीकों को सपोर्ट करता है। यह प्रोडक्ट थर्ड-पार्टी वेरिफाइड लाइफ-साइकिल असेसमेंट, एनवायरनमेंटल प्रोडक्ट डिक्लेरेशन, और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त आईएसओ और आरईएसीएच सर्टिफिकेशन द्वारा समर्थित है, जो पारदर्शिता, विश्वसनीयता और कम्प्लायंस सुनिश्चित करता है।


जैसे-जैसे ऑटोमोटिव, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उद्योग अधिक से अधिक लो-कार्बन मटीरियल की तलाश कर रहे हैं, हिन्दुस्तान जिंक और सिलॉक्स इंडिया के बीच यह पार्टनरशिप दिखाती है कि वैल्यू चेन में सहयोग भारत को अधिक सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल इकॉनमी की ओर ले जाने में किस प्रकार अपनी भूमिका निभा सकता है।

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