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January 8, 2026, 3:39 pm
KHABAR : अंधेरे को मात देकर दुनिया जीती, गांव की दुर्गा येवले ने वर्ल्ड कप में लहराया तिरंग, इंदौर आवासीय विद्यालय में दिव्यांग खिलाड़ी का हुआ सम्मान, पढे़ खबर 

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इंदौर। जहां हालात लोगों से सपने छीन लेते हैं, वहीं कुछ लोग उन्हीं हालात को चुनौती बना लेते हैं। बैतूल जिले के छोटे से गांव राखी से निकलकर ब्लाइंड वुमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2025 जीतने वाली दिव्यांग खिलाड़ी दुर्गा येवले ऐसी ही मिसाल बन चुकी हैं। आंखों की कमजोरी को अपनी पहचान पर हावी नहीं होने दिया और मेहनत के दम पर देश का नाम दुनिया में रोशन कर दिया।


दृष्टिहीन कल्याण संघ में 11वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई
कम उम्र में ही दुर्गा की नजर कमजोर होने लगी। दूर का देखना मुश्किल हुआ, पढ़ाई पर असर पड़ा। डॉक्टरों की सलाह पर सामान्य स्कूल की जगह ब्लाइंड हॉस्टल का रास्ता चुना गया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन बेटी के सपनों को बचाने के लिए यही जरूरी था। घर से दूर रहकर पढ़ाई करना, नई परिस्थितियों में खुद को संभालना दुर्गा के लिए रोज की जंग थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 10वीं तक की पढ़ाई बालिका छात्रावास में पूरी करने के बाद दुर्गा का सफर इंदौर पहुंचा। यहां महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में 11वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी की।


पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट उनका जुनून
यही वह जगह बनी, जहां दुर्गा को न सिर्फ शिक्षा मिली, बल्कि अपनी ताकत पहचानने का मौका भी मिला। पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट उनका जुनून बनता गया। साल 2022 में लगाए गए दिव्यांग क्रिकेट कैंप ने उनकी दिशा बदल दी। इसके बाद प्रैक्टिस, फिटनेस और तकनीक पर लगातार मेहनत शुरू हुई। नतीजा यह रहा कि दुर्गा का चयन पहले जिला स्तर, फिर इंदौर टीम में हुआ। विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। साल 2023 में दुर्गा ने मध्यप्रदेश टीम की ओर से नेशनल स्तर पर कदम रखा।बेंगलुरु में खेला गया पहला नेशनल मुकाबला उनके संघर्ष की सबसे बड़ी जीत था।


19 राज्यों की टीमों को पछाड़ते हुए चौंपियन का खिताब जीता
इसके बाद 2024 और 2025 में भी उन्होंने लगातार नेशनल टूर्नामेंट खेले। केरल में हुए मुकाबलों में मध्यप्रदेश ने 19 राज्यों की टीमों को पछाड़ते हुए चौंपियन का खिताब जीता। इस जीत में दुर्गा की भूमिका निर्णायक रही। लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर दुर्गा को इंडियन ब्लाइंड वुमेंस क्रिकेट टीम में जगह मिली। वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया और फाइनल में नेपाल को मात देकर ट्रॉफी अपने नाम की। दुर्गा इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा रहीं। यह जीत सिर्फ एक मैच की नहीं थी, बल्कि उस सोच की थी जो दिव्यांगता को कमजोरी मानती है।


हौसला जिंदा हो, तो मंजिल खुद रास्ता बन जाती
इस उपलब्धि के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुर्गा येवले को सम्मानित किया। आज दुर्गा पूरे प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका कहना है कि सही मौका और सच्ची मेहनत मिल जाए, तो कोई भी सीमा आड़े नहीं आती। अब इसी गौरव के साथ दुर्गा आज महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ पहुंची, जहां उनका सम्मान किया गय। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का स्वागत नहीं हुआ, बल्कि उस हिम्मत का सम्मान हुआ जिसने अंधेरे को हराकर रोशनी का रास्ता बनाया। दुर्गा येवले की कहानी साफ संदेश देती है-हौसला जिंदा हो, तो मंजिल खुद रास्ता बन जाती है।

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