मुरैना। अंबाह कस्बा के शाखा रोड पर संचालित किराना व्यवसायी सुरेश जैन राठी, सब्जी मंडी रोड पर संचालित दिनेश गुप्ता व सम्मति इंटरप्राइजेज नाम की फर्माे पर गुुरुवार को जीएसटी का छापा पड़ गया। दोपहर से शुरू हुई कार्रवाई देर रात तक चली। इस दौरान दुकान व गोदाम में रखे परचून के स्टाक से लेकर 2025 में खरीदे व बेचे सामान के कारोबार से जुड़े हिसाब-किताब को चेक किया। सर्वे के दौरान जीएसटी अधिकारी सुरेंद्र यादव व पिंकी घनघोरिया ने बही-खातों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि शुक्रवार की रात तक दोनों फर्मों के वास्तविक कारोबार का चिटठा सामने आ पाएगा। टैक्स चोरी पाए जाने पर पैनाल्टी की कार्रवाई तय होगी।
जीएसटी के सर्कल सेक्शन ने प्रारंभिक पड़ताल में पाया कि अंबाह की तीन किराना फर्मों सुरेश जैन राठी, सम्मति इटरप्राइजेज व दिनेश गुप्ता के यहां परचून का थोक व खेरीज कारोबार कस्बा में सबसे बड़ा कारोबार है। आंकलन के मुताबिक, शाखा रोड स्थित सुरेश जैन राठी के किराना दुकान की रोजाना की आय सात से आठ लाख रुपए तक है। सब्जी मंडी रोड पर संचालित दिनेश गुप्ता की किराना दुकान से भी प्रतिदिन पांच लाख रुपए का परचून थोक व खरीज में बिकता है। सम्मति इंटरप्राइजेज का भी प्रतिदिन लाखों का लेनदेन होता है। किराना व अन्य सामग्री की बिक्री, शादी की दावतों के अलावा, बड़े मृत्युभोज, भागवत कथा के भंडारे, बर्थडे व मैरिज एनीवर्सरी समेत विदाई समारोह की दावतों के लिए होती है। आसपास के गांव के खेरीज दुकानदार भी अपना परचून इन दुकानों से ही खरीदते हैं। दोनों प्रतिष्ठानों के कारोबार की तुलना में उक्त दोनों किराना व्यवसाईयों द्वारा जीएसटी की अदायगी नहीं की गई है। इससे जाहिर है कि किराना कारोबार जीएसटी अपवंचन कर रहे हैं। इसी आशंका को लेकर जीएसटी के ग्वालियर सर्कल की टीम दो टीमों में गुरुवार दोपहर 12 बजे अंबाह पहुंचकर तीनों कारोबारियों की दुकानों व गोदामों को पड़ताल के लिए अपने कब्जे में ले लिया। जीएसटी अधिकारियों ने अपना काम शुरू करने से पहले जो जहां मौजूद मिला उसे वहीं रोक दिया। सभी लोगों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए ताकि जीएसटी की कार्रवाई की जानकारी अन्य लोगों को नहीं मिल सके। रात 9 बजे तक जीएसटी की दो टीम में शामिल अधिकारी व कर्मचारी, बिजनेस से जुड़े सभी पहलुओं के डेटा को कलेक्ट करने में लगे देखे गए। जीएसटी अधिकारी ने बताया, कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है, कि यह तीनों फर्में जितना व्यवसाय कर रहे हैं उस अनुपात से जीएसटी जमा नहीं की जा रही है।