मनासा। दयासागर बालाजी समिति द्वारा मातारुंडी गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक हरिओम जी बैनेट ने भक्तों को जीवन का सार समझाते हुए कहा कि मनुष्य को भगवान से केवल मांगने के बजाय उन्हें सच्चे मन से मानना चाहिए। दुख का मूल कारण यही है कि लोग ईश्वर पर आस्था कम और अपेक्षाएं अधिक रखते हैं।
कथावाचक ने कहा कि मीरा ने भगवान श्रीकृष्ण को पूर्ण रूप से माना और उन्हीं में लीन हो गईं। भक्त प्रह्लाद ने भगवान नारायण पर अटूट विश्वास रखा, जिसके कारण अग्नि जैसी विपत्तियां भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकीं। उन्होंने कहा कि जो भक्त संसार में भगवान के अलावा कुछ नहीं चाहता, उसे जीवन में अंततः आनंद और शांति की प्राप्ति होती है।
हरिओम जी ने कहा कि आज का मानव इसलिए दुखी है क्योंकि वह भगवान को मानता नहीं, बल्कि उनसे केवल मांगता है। यदि जीवन में स्थायी आनंद चाहते हो तो भगवान को मानो, उनसे कुछ मत मांगो। दुख की जड़ स्वतः समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दुख में भी प्रसन्न रहता है, वह प्रभु-प्रेमी होता है और जो सुख में ही प्रसन्न रहता है, वह माया-प्रेमी होता है। संसार अच्छा दिखना चाहिए, लेकिन भगवान अच्छे लगने चाहिए। जितना अधिक साधना करोगे, उतना ही जीवन में साधुता का भाव विकसित होगा। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।