उज्जैन। आज से जल सुनवाई की शुरुआत हुई, जिसमें पेयजल समस्याओं को लेकर लोग नौ अलग-अलग स्थलों पर पहुंचे। सुबह 10 बजे शुरू हुई सुनवाई के पहले ही एक घंटे में विभिन्न जोनों के कार्यालयों में करीब एक दर्जन शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। इस दौरान महापौर स्वयं अलग-अलग स्थलों पर पहुंचे, उपभोक्ताओं से फोन पर बात की और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मंगलवार से जन सुनवाई की तर्ज पर जल सुनवाई शुरू की गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा बुधवारिया पानी की टंकी, दशहरा मैदान, चकोर पार्क, देवास गेट, नागझिरी पानी की टंकी, नगर निगम मुख्यालय (आगर रोड), कलेक्टर कार्यालय कोठी और ऋषिनगर पानी की टंकी सहित नौ स्थलों पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक सुनवाई आयोजित की गई।
दोपहर 12 बजे तक बुधवारिया में एक, पीएचई कार्यालय में छह और दशहरा मैदान में दो शिकायतें दर्ज की जा चुकी थीं। इनमें चेंबर लीकेज, गंदा पानी आने और पाइपलाइन लीकेज की शिकायतें सबसे अधिक रहीं।
दूषित पानी की सबसे ज्यादा समस्या
जल सुनवाई के पहले दिन महापौर मुकेश टटवाल स्वयं देवास गेट टंकी और दशहरा मैदान टंकी पर पहुंचे। यहां उन्होंने शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन पर बात कर समस्याएं जानीं और शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया। फ्रीगंज के व्यवसायी घनश्याम पेशवानी भी गंदे पानी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। उन्होंने समस्या को गंभीरता से सुनने और त्वरित समाधान के भरोसे पर महापौर की सराहना की।
50 शिकायतों के बाद भी सुधार नहीं
जल सुनवाई के दौरान माधवनगर निवासी राजेंद्र कुमार महिवाल दशहरा मैदान स्थित पीएचई कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में पहले लगातार गंदा पानी आता था और इस संबंध में करीब 50 बार शिकायत की गई, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। मजबूरी में पीने और खाना बनाने के लिए आरओ का पानी मंगवाना पड़ता है। हाल ही में पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन यह व्यवस्था नियमित रहेगी या नहीं, इसे लेकर अब भी संशय बना हुआ है।