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January 13, 2026, 8:01 pm
NEWS : मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन एवं न्यूनीकरण के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, संघर्ष के स्थायी समाधान को लेकर विभिन्न विभागों की सहभागिता, ठोस रणनीति तैयार करने पर दिया जोर, पढ़े खबर 

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चित्तौड़गढ़। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के प्रभावी प्रबंधन एवं उनके न्यूनीकरण के उद्देश्य से मंगलवार को जिला परिषद सभागार, चित्तौड़गढ़ में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

उल्लेखनीय है कि 8 जनवरी 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख), राजस्थान, जयपुर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित जिलों में उच्च स्तरीय कार्यशालाएँ आयोजित करने का निर्णय लिया गया था, ताकि समस्या के स्थायी एवं व्यवहारिक समाधान हेतु ठोस रणनीति तैयार की जा सके।

इसी क्रम में आयोजित इस कार्यशाला में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के साथ जिला प्रशासन, वन विभाग, राजस्व, ग्रामीण विकास, विद्युत, रेलवे, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय समुदाय प्रतिनिधियों, विषय विशेषज्ञों, शोध संस्थानों एवं सिविल सोसायटी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कार्यशाला के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इनमें जीपीएस एवं मैपिंग आधारित संघर्ष हॉटस्पॉट्स की पहचान, प्रजाति-विशिष्ट संघर्ष के कारणों का विश्लेषण, वर्तमान में लागू न्यूनीकरण (मिटिगेशन) उपायों एवं उनके क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियाँ, आधुनिक तकनीकी साधनों जैसे कैमरा ट्रैप, डिजिटल अलर्ट सिस्टम एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र का उपयोग, मुआवजा भुगतान में होने वाले विलंब के कारणों की समीक्षा तथा शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के उपाय, साथ ही समुदाय आधारित हस्तक्षेप एवं रोकथाम के प्रयास प्रमुख रहे।

कार्यशाला का संचालन उप वन संरक्षक राहुल झाझड़िया द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में वन भूमि में निरंतर हो रही कमी, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में परिवर्तन तथा इसके परिणामस्वरूप मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने सरल, व्यवहारिक एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपायों को अपनाकर संघर्ष की घटनाओं में कमी लाने पर बल दिया।

कार्यशाला के समापन पर उपस्थित अधिकारियों, विभागीय प्रतिनिधियों, संगठनों एवं अन्य हितधारकों द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श किया गया तथा अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं अनुशंसाएँ उप वन संरक्षक को प्रस्तुत की गईं। इन सुझावों को आगामी कार्ययोजनाओं में सम्मिलित किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई।

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