नीमच। एसआईआर (मतदाता सूची संशोधन) के तहत फर्जी आपत्तियां लगाए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक चिंता का विषय बनता जा रहा है। कांग्रेस और जिला मुस्लिम इंतजामिया कमेटी द्वारा हाल ही में कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देकर उठाए गए सवालों के बीच अब पोलिंग नंबर 89, शौकत अलीगंज छोटी मंडी क्षेत्र से सामने आए मामले ने पूरे घटनाक्रम पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
इस पोलिंग बूथ से एक साथ करीब 52 मतदाताओं के खिलाफ फॉर्म नंबरदृ7 के माध्यम से आपत्तियां दर्ज की गई हैं। आपत्तियों में संबंधित मतदाताओं को “मौजूद नहीं” बताया गया है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
मीडिया की स्वतंत्र पड़ताल में जिन मतदाताओं को अनुपस्थित दर्शाया गया, वे अपने घरों और मोहल्लों में साक्षात मौजूद मिले। मीडिया द्वारा ली गई तस्वीरों में उनके चेहरे साफ दिखाई दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में आपत्तियां बिना सत्यापन और सुनियोजित तरीके से दर्ज की गई हैं।
जिन प्रमुख नामों पर आपत्तियां लगाई गई हैं, उनमें पूर्व पार्षद डॉ. नूर मोहम्मद (पिता फकीर मोहम्मद), उनकी पत्नी खुर्शीद बी, प्रवेश (पिता अकरम कुरैशी), अब्दुल वाहिद चक्की वाले, मिर्जा मोहम्मद इलियास रंग वाले, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद नईम एवं उनके परिवार सहित अन्य मतदाता शामिल हैं।
प्रभावित मतदाताओं का आरोप है कि आपत्ति लगाने वालों के नाम अल्पसंख्यक समुदाय से बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने पर अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आए। कई फॉर्मों में आपत्तिकर्ताओं के नाम और लिखावट एक जैसी प्रतीत हो रही है, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि आपत्तियां योजनाबद्ध ढंग से एक ही स्रोत से लगाई गई हैं।
कांग्रेस पार्षद इकबाल कुरैशी ने इस पूरे मामले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जिस तरह फर्जी आपत्तियां लगाई जा रही हैं, उससे विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप अब जमीन पर सही साबित होते दिख रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
प्रभावित मतदाताओं ने निर्वाचन अधिकारी से नियमानुसार जांच कर फर्जी आपत्तियां लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो आम नागरिकों का व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से विश्वास डगमगा सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या ठोस कदम उठाता है।