जगन्नाथपुरी (उड़ीसा)। अखिल भारतीय मजदूर संघ का 29वां तीन दिवसीय त्रैवार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन 6 से 8 फरवरी तक जगन्नाथपुरी, उड़ीसा में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस अधिवेशन में भारत सहित 23 देशों के श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। नेपाल, जापान, रूस सहित कई देशों से प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
अधिवेशन में हजारों की संख्या में देश-विदेश से आए पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम मंत्री मंशुख मांडविया, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा उड़ीसा के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी सम्मेलन को अपना समर्थन दिया।
अधिवेशन के दौरान श्रम कानूनों पर विस्तृत चर्चा की गई। भारतीय मजदूर संघ द्वारा पूर्व के 29 श्रम कानूनों को समाहित कर बनाए गए चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) पर विचार-विमर्श हुआ। कुछ प्रावधानों पर संगठन ने असहमति जताई है, जिस पर लगातार संवाद जारी है। केंद्र सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि भारतीय मजदूर संघ राष्ट्रहित, उद्योगों के विकास और श्रमिकों के हितों को लेकर गंभीरता से कार्य करता है।
सम्मेलन के दौरान बाबा जगन्नाथ की नगरी में समुद्र तट पर एक ऐतिहासिक रैली निकाली गई। इस रैली में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा-ऊषा कार्यकर्ता, मध्याह्न भोजन तथा आउटसोर्सिंग से जुड़ी महिला कर्मियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। समुद्र तट से श्रमिक एकता और अधिकारों का सशक्त संदेश दिया गया।
मंच पर देश-विदेश से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिससे कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण रहा। अधिवेशन के दौरान नई राष्ट्रीय समिति का गठन भी किया गया।
इस अवसर पर खरगोन जिले से भी भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें खरगोन-बड़वानी प्रमुख पंकज मलतारे, जिला मंत्री नरेंद्र पटेल, अंतिम जायसवाल (बड़वानी जिला मंत्री), लोकेश सोलंकी (धार जिला मंत्री) सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यह अधिवेशन श्रमिक एकता, संगठन विस्तार और श्रम नीतियों पर मंथन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।