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February 13, 2026, 2:27 pm
BIG NEWS : जनगणना में राजनीतिक और क्षेत्रीय चुनौतियों का रखें ध्यान, सीएम मोहन बोले, कलेक्टर ध्यान रखें, विकास को लेकर किसी जिले में विवाद की स्थित न बने, संवेदनशील बन काम करें, पढे़ खबर 

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कलेक्टरों से कहा है कि विकास के लिए कराए जा रहे निर्माण कार्यों का विरोध नहीं होना चाहिए। कलेक्टर ध्यान रखें कि जिले के अंदर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। संवेदनशील तरीके से समस्याओं का निराकरण करें। कठिनाई आ रही है तो मार्गदर्शन लें और हर स्थिति में नियंत्रण होना चाहिए। हमें विकास चाहिए लेकिन स्थानीय बासिंदों को परेशान करके नहीं चाहिए। उनके साथ संवेदना रखना चाहिए। कोई ऐसी बात नहीं आना चाहिए कि लोगों की शिकायतें आएं। अगर कुछ होता है तो अपने स्तर के नेटवर्क से ही सारा काम कर लें।


एमपी में होने वाली जनगणना के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि इस बार की जनगणना सबसे हटकर है। सामाजिक स्तर की जनगणना 1931 में हुई थी। इसके बाद अब सामाजिक जनगणना होने वाली है। एमपी में मजरा टोलों की आवासीय बस्तियों के साथ पुनरू आबाद होने वाले गांवों की ओर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है। राजनीतिक और क्षेत्रीय दृष्टि से चुनौतियां भी आएंगी। पारदर्शिता और प्रतिबद्धता में निष्पक्षता स्पष्ट दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि होली जैसे त्यौहार पर हाईअलर्ट पर रहें। मिलावटी मिठाई और अन्य मिलावट के मामलों में कार्यवाही करें। आदर्श स्थिति बनी रहे। सामाजिक समरसता का माहौल जिले में हो। वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति कर राजस्व बढ़ाने का काम करें। विधानसभा के सभी प्रश्नों के समय पर सही जवाब देकर सरकार की मंशा को पूरा कराने का काम करें।


जिसने चुनाव, जनगणना करा दी, वह फील्ड का अच्छा अनुभवी- अनुराग
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस मौके पर कहा कि पहले यह कहा जाता है जिसने चुनाव करा लिया और जनगणना करा ली, उसने फील्ड में बहुत काम सीखा है। जनगणना में तकनीक के साथ बदलाव आया है। प्रशासनिक जानकारी आने पर पहले छह से सात साल लग जाते थे लेकिन इसमें तेजी से काम होगा। मध्यप्रदेश में 53 हजार गांव हैं और मजरे टोलों को गिन लें तो एक लाख 27 हजार हो जाते हैं। भारत सरकार के अफसरों से आग्रह है कि जीआईएस बेस्ड मकान गणना में मजरे टोले का डेटा अलग से मिल जाए, ऐसा काम कर दें ताकि राज्य सरकार को मजरे टोलों के विकास के लिए योजना बनाने में आसानी हो। सेकेंड फेज में भी जीआईएस मैपिंग की जाए, ऐसा राज्य सरकार चाहती है।


गलत जानकारी देने वालों को कोई फायदा नहीं होगा
सीएस जैन ने कहा कि रात 12 बजे गणना होगी। एक मई से मकान गणना इसलिए रखी गई है क्योंकि इस दौरान स्कूलों की छुट्‌टी रहती है। टाइम बाउंड कैलेंडर के हिसाब से काम करना है। डेटा एंट्री सही हो, यह सभी को ध्यान रखना है। जनगणना में जानकारी गलत देने से कोई फायदा नहीं होगा। इसलिए जानकारी सही देना उचित रहेगा। जैन ने कहा कि व्यक्ति की जानकारी कहीं पब्लिश भी नहीं होगी। इसलिए इसके लिए जागरुक करने के लिए कलेक्टरों, संभागायुक्तों को काम करना होगा।


जनगणना का इस्तेमाल राष्ट्र की प्रगति के लिए योजनाएं बनाने में- मृत्युंजय कुमार
जनगणना रजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना के काम को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी इसका उदाहरण है। मृत्युंजय कुमार ने कहा कि ऋग्वेद में भी जनगणना का उल्लेख किया है। आधुनिक काल में 1872 से इसकी शुरुआत हुई है। आजादी के बाद आठवीं जनगणना है। वैसे यह 16वीं जनगणना है। राष्ट्र की प्रगति का एक मजबूत आधार स्तंभ जनगणना है। जनगणना के आंकड़ों का व्यापक इस्तेमाल नीति निर्धारण, योजनाओं के आकलन और क्रियान्वयन में किया जाता है। यह राष्ट्र का दर्पण है। किस प्रकार की योजनाएं राष्ट्र की प्रगति के लिए चलानी चाहिए, इससे यह पता चलता है। मकानों की गणना के लिए पहले चरण की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। प्रश्नावली भी जारी हो चुकी है। यह चरण जितना अच्छा होगा, उतना ही अच्छा दूसरा फेस होगा।


तीन स्तर के प्रशिक्षण के बाद होगी जनगणना
रजिस्ट्रार ने कहा कि जनगणना पदाधिकारियों की नियुक्ति किए जाने और तैयारियां एक मई के पहले की जाएंगी। प्रगणक सही सूचना और जानकारी दर्ज करें। यह जनगणना 16 साल बाद हो रही है। थोड़ी सी चूक आंकड़ों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे ध्यान में रखकर काम करना होगा। तीन स्तर की प्रशिक्षण व्यवस्था तय की गई है। जनगणना की प्रक्रिया हर राज्य में एक समान हो, इसलिए पिछली जनगणना का समावेश भी परिपत्रों के जरिये किया गया है। पहले फेस में आवासीय परिस्थितियां, उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों की जानकारी जुटाई जाती है। प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर जानकारी जुटाते हैं।


इस बार की जनगणना इसलिए है अलग
मृत्युंजय कुमार ने कहा कि वर्तमान जनगणना कुछ मायनों में पुरानी जनगणना से अलग है। मोबाइल एप्लीकेशन, पोर्टल आदि के माध्यम से पहली बार डिजिटल जनगणना हो रही है। पहले जनगणना का काम पूरा होने में 18 माह का समय लग जाता था। अब डिजिटल जनगणना से जल्दी काम पूरा होगा। अब तक स्वगणना का कोई विकल्प नहीं था। इस जनगणना में हर व्यक्ति स्वगणना विकल्प का उपयोग कर सकता है। इस बार दूसरे चरण में जाति की गणना की जाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। फिर जनगणना 2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षण सत्र में प्रदेश के सभी संभागायुक्त, जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हो रहे हैं।


एक मई से शुरू होगी मकानों की गणना
इन अधिकारियों को यह सिखाया जाएगा कि इस साल होने वाली मकानों की डिजिटल गणना कैसे की जाएगी और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी? मॉनिटरिंग और एक्जीक्यूट करने के लिए क्या तरीका अपनाना होगा? एक मई से शुरू होने वाली मकानों की गणना के लिए इन अधिकारियों को प्रशिक्षण देने भोपाल बुलाया गया है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की मौजूदगी में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे।


केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन होने वाली जनगणना के लिए प्रदेश के गृह विभाग के सचिव और राज्य नोडल अधिकारी जनगणना अभिषेक सिंह ने सभी कलेक्टरों, संभागीय आयुक्तों, नगर निगम आयुक्तों को पत्र लिखकर प्रशिक्षण में आने के लिए कहा है।


इसमें कहा गया है कि जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए 13 फरवरी को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसका पहला चरण मकान गणना के रूप में इसी साल एक मई से शुरू होने वाला है। इसके लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है।

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