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February 13, 2026, 6:59 pm
KHABAR : एमपी का दूसरा महाकालेश्वर मंदिर, राजा विक्रमादित्य ने बहन की ससुराल में बसा दी महाकाल की नगरी, कुंड के पानी का नहीं ढूंढ पाएंगे स्रोत, पढे़ खबर 

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शाजापुर। मध्य प्रदेश का सुंदरसी, धार्मिक नगरी उज्जैन की तरह अपने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के लिए जाना जाता है. कालीसिंध नदी के तट पर स्थित यह मंदिर उज्जैन से 70 से 80 किलोमीटर और शाजापुर जिला मुख्यालय से 30 से 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। 


सुंदरसी शाजापुर जिले का एक शहर है जो अपने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के लिए जाना जाता है. यह हूबहू उज्जैन के ज्योतिर्लिंग जैसा है. कालीसिंध नदी के तट पर स्थित है.सुंदरसी कस्बे के इस मंदिर का उल्लेख पुरातत्व से जुड़ी किताबों में देखने को मिलता है. शाजापुर जिले के इतिहास से जुड़ी पुस्तकों में यहां के महाकाल मंदिर और उज्जैन की तर्ज पर बने यहां के हर मंदिर का जिक्र है. कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने उज्जैन नगर से बाहर महाकालेश्वर का जो एक और मंदिर बनवाया, वह सुंदरसी ही है। 


कैसे हुआ मंदिर का निर्माण?
सम्राट विक्रमादित्य की छोटी बहन सुन्द्राबाई का विवाह सुन्दरसी के राज पुत्र कुंवर भगत सिंह से हुआ था. सुन्द्राबाई जब तक अवंतिका के प्रमुख तीर्थों के दर्शन नहीं कर लेती थीं, तब तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करती थीं. बहन के इसी भक्तिभाव को देख राजा विक्रमादित्य ने अवंतिका के प्रमुख तीर्थों की सुंदरसी में  स्थापना की. इसीलिए यह नगरी अवंतिका के नाम से विख्यात हुई. बाद में सुन्द्राबाई के नाम पर इसका नाम सुंदरगढ़ पड़ा, जो कालांतर में सुन्दरसी हो गया. यह नगरी लगभग सौ वर्ग किमी क्षेत्र में बसी हुई थी. आजादी के कुछ समय पूर्व तक नगरी के आस-पास 84 ग्राम थे जो धार, देवास, इन्दौर तथा ग्वालियर स्टेट में विभाजित थे. इनके 4 थाने, 4 कचहरी, 4 जेल भी थे. एक शामलात कचहरी थी, जिसमें इन चारों स्टेट्स के विवादित प्रकरणों का निराकरण होता था. इसे सर्वाेच्च न्यायालय के अधिकार प्राप्त थे। 


मंदिर की गर्भगृह में अनूठा कुंड
सुंदरसी के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में एक कुंड बना हुआ है. इस कुंड के बारे में मान्यता है कि इसका रास्ता उज्जैन महाकाल मंदिर में निकलता है. साधु-महात्मा इसी कुंड के अंदर से निकलकर महाकाल मंदिर पहुंचते थे. हालांकि मंदिर में वर्षों से सेवाएं दे रहे अर्जुन राठौर ने ऐसे किसी तथ्य से इनकार किया. उन्होंने कहा कि इस कुंड के पानी से मंदिर में विराजमान शिवलिंग का अभिषेक किया जाता था. हालांकि अब कुंड में कुछ भी नहीं हैं। 


मंदिर के पीछे सूरज कुंड का क्या है रहस्य
इसी मंदिर के पीछे एक और कुंड भी बना हुआ है, जिसका निर्माण काल मंदिर के समय का ही बताया जाता है. मंदिर में काम करने वाले रामलाल ने बताया कि सूरज कुंड में पानी कहां से आता है या इसका पानी सूखता क्यों नहीं, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता. महाकालेश्वर मंदिर के बाहरी हिस्से में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां भी बिखरी हैं, जो काफ़ी प्राचीन बताई जाती हैं. इस मंदिर में महाकाल के अलावा अनेक देवी-देवताओं का वास है. साथ ही यहां हनुमान मंदिर के पास 12 ज्योतिर्लिंग और शनि मंदिर के पास नवग्रह भी बने हुए हैं। 

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