मनासा। नीमच जिले के मनासा नगर में नगर परिषद की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नगर परिषद मनासा द्वारा बिना किसी पूर्व लिखित अथवा मौखिक सूचना के 20 वर्षों से आबाद झुग्गी-बस्ती पर बुलडोजर चला दिया गया, जिससे दर्जनों गरीब परिवारों के घर पलभर में मलबे में तब्दील हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 फरवरी को नगर परिषद का अमला पुलिस बल के साथ अचानक कमला नेहरू कॉलोनी के पीछे स्थित बस्ती में पहुंचा और जेसीबी से तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी। पीड़ितों का आरोप है कि कार्रवाई का तरीका अत्यंत अमानवीय था और लोगों को अपना सामान तक निकालने का अवसर नहीं दिया गया।

बताया गया कि कई घरों में बुजुर्ग, बीमार तथा ऑपरेशन से उबर रहे लोग मौजूद थे, बावजूद इसके बुलडोजर नहीं रोका गया। इस कार्रवाई के चलते महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे आ गए। राशन, बिस्तर और दैनिक उपयोग का सामान मलबे में दब गया या बाहर फेंक दिया गया।

पट्टा दिलाने के नाम पर अवैध वसूली के आरोप-
पीड़ित परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले एक वर्ष से पट्टा दिलाने के नाम पर प्रति परिवार 10 से 20 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई। रामगोपाल सोनी नामक व्यक्ति पर बड़ी राशि ऐंठने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीड़ित-
कार्रवाई के बाद आक्रोशित और बेघर हुए परिवार रोते-बिलखते कलेक्टर कार्यालय नीमच पहुंचे और ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि उन्हें उसी स्थान पर पुनः बसाया जाए, वैध पट्टे प्रदान किए जाएं, हुए नुकसान की भरपाई की जाए तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

पीड़ितों का सीधा सवाल है कि क्या वर्षों से बसे गरीब परिवारों को बिना सूचना बेघर करना न्यायसंगत है। अब प्रशासन के समक्ष चुनौती है कि वह इस संवेदनशील मामले में पारदर्शी जांच कर त्वरित राहत प्रदान करे, अन्यथा मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।