चित्तौड़गढ़। साइबर थाना चित्तौड़गढ़ पुलिस ने साइबर ठगी में प्रयुक्त म्यूल बैंक खातों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों के बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने और नकद निकासी के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, राजस्थान पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधों में प्रयुक्त संदिग्ध बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर एक संदिग्ध बैंक खाते की जांच की गई, जिसका संबंध विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों से पाया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लोकेश गुर्जर के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में 3 नवंबर से 7 नवंबर 2025 के बीच करीब एक करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। प्रारंभिक जांच में यह राशि साइबर ठगी से जुड़ी होने की आशंका सामने आई।
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के निर्देश तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के सुपरविजन में साइबर थाना प्रभारी मनीष शर्मा और उनकी टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में लोकेश गुर्जर (23) निवासी नाड़ोलिया, सूरज माली (26) निवासी पावटा दरवाजा तथा रोहितांश बेनीवाल (23) निवासी बापू कॉलोनी, चित्तौड़गढ़ शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने गिरोह में अन्य सदस्यों के शामिल होने की जानकारी भी दी है।
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण क्रमांक 18/2026 में धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, जहां उनसे गिरोह के अन्य सदस्यों, मनी ट्रेल, लाभार्थियों और साइबर ठगी के नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जाएगी।
पुलिस के अनुसार आरोपी पूर्व नियोजित तरीके से साइबर ठगी से प्राप्त रकम विभिन्न बैंक खातों में प्राप्त कर उसे तत्काल अन्य खातों में ट्रांसफर कराते थे तथा नकद निकासी कर धन के स्रोत को छिपाने का काम करते थे। मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य आरोपियों की संलिप्तता मिलने पर उनके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।