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February 21, 2026, 4:48 pm
KHABAR : ग्रहण में पानी से होली खेलने की मनाही, गैर निकाल सकेंगे, चंद्रमा जल का कारक अनिष्ट होने की आशंका, सिर्फ गुलाल से खेली जाएगी होली, पढे़ खबर 

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उज्जैन। फाल्गुन पूर्णिमा पर इस वर्ष होली और चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं। 3 मार्च को ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण का सूतक प्रातः 6ः47 बजे से प्रारंभ होकर ग्रहण मोक्ष तक प्रभावी रहेगा। शाम 6ः47 बजे तक धुलेंडी पर्व पर सूतक का साया रहेगा। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, इसलिए इस बार सूखी होली खेलना ही मंगलकारक है। पानी का उपयोग करने से कई अनिष्ट हो सकते हैं।


गैर निकलेगी, लेकिन पानी से नहीं खेलेंगे होली
उज्जैन के सिंहपुरी, कार्तिक चौक सहित प्रदेश के कई हिस्सों में धुलेंडी पर पारंपरिक गैर निकालने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार सूतक काल में भी परंपरागत गैर निकाली जा सकेगी, क्योंकि मान्यता है कि परंपरा के कार्य एक प्रहर में किए जाएं तो दोष नहीं लगता।


हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि चंद्र ग्रहण के दिन जल से होली खेलने से बचना चाहिए। चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, इसलिए इस दिन केवल गुलाल से होली खेलना ही उचित रहेगा। जल से होली खेलने पर मानसिक अशांति या नकारात्मक प्रभाव की आशंका बताई गई है। 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा। शाम 5रू55 बजे से भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च की सुबह 4ः28 बजे तक रहेगा। पंडित डिब्बेवाला के अनुसार भद्रा भू-लोक पर मानी जा रही है, ऐसे में प्रदोष काल में होलिका पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। इस दौरान दान-पुण्य भी किया जा सकता है।चंद्र ग्रहण दोपहर 3ः19 बजे से शाम 6ः47 बजे तक रहेगा। ग्रहण समाप्ति से 12 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। सूतक के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं और मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं। ज्योतिषाचार्य ने सलाह दी कि सुबह 6ः30 से 9ः30 बजे तक बुजुर्ग और मरीज भोजन कर सकते हैं, लेकिन दिन और शाम के समय संयम रखकर भजन-पूजन करना उचित रहेगा।

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