ग्वालियर। विशेष न्यायाधीश (साइबर क्राइम) विवेक कुमार ने क्रेडिट कार्ड फ्रॉड केस में एक आरोपी को संदेह के आधार पर लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने इस दौरान पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्रेडिट कार्ड से फ्रॉड मामले में कुल तीन आरोपी थे। पुलिस ने एक आरोपी के खिलाफ जांच कर उसे पकड़ा और कोर्ट में चालान पेश किया।
लेकिन जिस आरोपी ने कॉल किया था और जिसके अकाउंट में ठगी के रुपए ट्रांजेक्शन हुआ उसकी न जांच की गई न ही पकड़ा गया। न ही जांच में कहीं उनका जिक्र किया गया। कोर्ट में स्वीकार भी किया गया कि उनको आरोपी नहीं बनाया गया है। अब कोट्र ने विवेचना अधिकारी को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है।
ऐसे समझिए पूरा मामला
ग्वालियर निवासी रवि शिवहरे एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। 03 अगस्त 2018 को उनके मोबाइल पर कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का कर्मचारी बताते हुए केवायसी के नाम पर एक ओटीपी जनरेट होने की बात कहते हुए पूछा था। ओटीपी शेयर करते ही रवि शिवहरे के क्रेडिट कार्ड से 32810 रुपए की अमाउंट ट्रांसफर हो गई थी। यह राशि पहले क्रेडिट कार्ड से एक वॉलेट में ट्रांसफर होकर अकाउंट में ट्रांजेक्शन हुआ था।