मंदसौर। बहुचर्चित हिस्ट्रीशीटर और ड्रग माफिया वाहिद उर्फ भय्यू लाला की संदिग्ध मौत का मामला अब और गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी मौत कान के पीछे गोली लगने से हुई। गोली कान के पीछे से घुसकर आंख के पास से बाहर निकली, जिससे उसकी जान चली गई।

एडिशनल एसपी हेमलता कुरील ने पुष्टि की कि भय्यू लाला की मौत पुलिस की पिटाई से नहीं हुई, बल्कि गोलीबारी के कारण हुई। भय्यू को तीन लोग पहले निजी क्लीनिक ले गए थे, लेकिन क्लीनिक से लौटकर घर पर लाया गया। शव को घर में पलंग पर रखा गया और वीडियो बनाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि बाथरूम में गीजर के ऊपर एक पिस्टल मिली, जिसे जब्त किया गया। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि गोली किस पिस्टल से लगी और किसने चलाई। परिजनों का आरोप है कि पिस्टल को फर्जी तरीके से रखा गया।

परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। बेटे शाहिद ने कहा कि उनके पिता पर कई झूठे मामले बनाए गए थे। पिता कोर्ट में सरेंडर करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने 6 लाख रुपए लेने के बाद भी उन्हें मार डाला। पत्नी रुखसाना ने कहा कि पुलिस उनके पति को डेढ़ घंटे तक मारती रही और उन्होंने चीखने की आवाजें सुनीं।

परिवार का कहना है कि भय्यू लाला अपनी बेटी की शादी के लिए सामान्य जीवन जीना चाहता था और इसी सिलसिले में कोर्ट में सरेंडर करने आया था। वहीं पुलिस का दावा है कि भय्यू लाला दम घुटने से मरा। सीतामऊ एसडीओपी दिनेश प्रजापति ने कहा कि जब टीम दबिश देने गई, तो भय्यू बेड बॉक्स में छिप गया था, जिससे उसकी मौत हुई।

वाहिद उर्फ भय्यू लाला का इतिहास भी गंभीर है। 2003 से अपराध की दुनिया में सक्रिय, उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में लूट, डकैती, हत्या का प्रयास, अवैध हथियार और मादक पदार्थ तस्करी जैसे 19 मामले दर्ज हैं। वह मंदसौर-नीमच क्षेत्र में एमडी ड्रग्स का बड़ा तस्कर माना जाता था और नाबालिगों तथा कॉलेज छात्रों का इस्तेमाल करता था।

फिलहाल मामले की असली सच्चाई फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। परिवार ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ नामजद शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
