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February 23, 2026, 10:18 am
KHABAR : सर्वसमाज की बैठक में होलिका दहन 2 मार्च रात्रि 1.30 बजे व धलेण्डी पर्व 4 मार्च को मनाने का लिया निर्णय, पढे़ मुकेश पार्टनर की खबर

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नीमच। सर्वसमाज की बैठक रविवार 22 फरवरी 2026 को बिचला गोपाल मंदिर में दोपहर 3 बजे आयोजित हुई जिसमें बड़ी संख्या में सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और बैठक में कर्मकाण्डीय विप्र परिषद के होली दहन और धुलेण्डी के पर्व के निर्णय को अपनी सहमति प्रदान करते हुए सभी ने एक स्वर में सर्वसमाज की बैठक में तय किया गया कि होलिका दहन 2 मार्च 2026 को रात्रि 1.30 बजे किया जायेगा व धुलेण्डी पर्व 4 मार्च को मनाया जायेगा। इस वर्ष होलिका दहन और धुलेण्डी पर्व को लेकर जनमानस में संशय बना हुआ है। इस विषय को लेकर पंचांग कर्ताओं में केलेण्डरों मे भिन्न-भिन्न मत है। इसी भ्रम को दूर करने के लिए नीमच की व्रत, पर्व, त्यौहार आदि के विषय में शास्त्रोक्त निर्णय देने वाली विश्वसनीय संस्था कर्मकाण्डीय विप्र परिषद के द्वारा विगत दिन एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें परिषद ने विभिन्न  पंचांगों धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु एवं मुहूर्त्त संबंधी अन्य ग्रथों का अध्ययन करते हुए एवं व्यावहारिक पक्ष को दृष्टिगत रखते हुए गहन शास्त्रीय विचार विमर्श करने के उपरान्त भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीनतम पंचांग वल्लभ मनीराम, जयविनोदी, बंशीधर, सम्राट आदि के द्वारा प्रकाशित मुहूर्त फाल्गुन कृष्णा 14 सोमवार दिनांक 2 मार्च 2026 को होलिका दहन का समय मध्यरात्रि उपरान्त 1.30 बजे भद्रा पुच्छ (भद्रा पुच्छ रात्रि 1.26 से 2.30) में करना श्रेष्ठ रहेगा। यथा
भद्रायां द्वे न कर्तव्ये, श्रावणी फाल्गुनी तथा
श्रावणी नृपतिं हंति, राष्ट्र दहति फाल्गुनी (श्रावणी-रक्षाबंधन) (फाल्गुनी-होली)
उपरोक्त श्लोक अनुसार भद्रा में होली का दहन निषेध है किन्तु निम्न श्लोक अनुसार भद्रा पुच्छ में होली दहन करना शुभ फलकारक माना गया है।
पृथिव्यां यानि कार्याणि शुभानि त्व ऽ शुभानि च।
तानि सर्वाणि सिध्यन्ति विष्टि (भद्रा) पुच्छे न संशयः।।
भद्रा पुच्छ में पृथ्वी पर जो भी कर्म किये जायेंगे सभी सिद्धिकारक होंगे इसमें कोई संशय नहीं है।
होली के विषय में अन्य जानकारियॉं-
(1) होलाष्टक- 24 फरवरी 2026 से 2 मार्च 2026 होलिका दहन तक।
(2) गोबर के बडकूले, खेराखांडा आदि थापना-27 फरवरी 2026 शुक्रवार एकादशी को दिन में 11 बजकर 33 मिनिट के पहले तक करना शुभ है। (इसके बाद भद्रा लग जाएगी)
(3) 2 मार्च के दिन भद्रा का समय- शाम को 5.56 बजे से 3 मार्च को प्रातः 5.29 बजे तक रहेगा।
(4) होलिका का पूजन- 2 मार्च को शाम को 5.56 (भद्रा लगने) से पहले  
(5) पूर्णिमा व्रत एवं होलिका दहन-2 मार्च 2026 सोमवार होलिका दहन अर्धरात्रि 1.26 से 2.30 बजे (भद्रा पुच्छ में) करना शुभ रहेगा।
(6) डोरे लेना एवं गणगौर पूजन एवं होली ठण्डी करना-2 मार्च 2026 सोमवार की अर्धरात्रि 1.30 बजे बाद अर्थात् होलिका दहन के बाद से लेकर 3 मार्च 2026 मंगलवार को सुबह 6.55 (सूर्योदय) के पहले पहले तक। (इसके बाद सूर्योदय के साथ ही चन्द्रग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जावेगा) अगले दिन 4 मार्च को तीन दिन के डोरे लेना शुभ नहीं है।


(7) धूलेण्डी पर्व-4 मार्च 2026 बुधवार को मनेगा।


3 मार्च को धुलेण्डी पर्व मनाना शुभ क्यों नहीं ?
3 मार्च को धुलेण्डी पर्व मनाना शुभ नहीं है क्योंकि 3 मार्च को सूर्योदय प्रातः 6.55 से चन्द्रग्रहण का सूतक प्रारम्भ हो जायेगा जो शाम 6.47 तक रहेगा। और सांय 6.30 से 6.47 तक चन्द्रग्रहण दिखेगा, अतः 3 मार्च के दिन प्रातः सूर्योदय से चन्द्रग्रहण का सूतक लगने के कारण सभी मंदिरों के पट बन्द रहेंगे जिस कारण भगवान के साथ होली खेलना निषेध रहेगा। चन्द्रग्रहण के सूतक के कारण डोरे लेना एवं गणगौर पूजा करना भी निषेध रहेगा। इस चन्द्रग्रहण के दौरान भोजन आहार लेना भी निषेध है। इसलिये 3 मार्च धुलेण्डी पर्व मनाना शुभ नहीं है सूतककाल से चन्द्रग्रहण पूर्ण होने तक एकान्तवास, भगवान का ध्यान करना, कीर्तन करना लाभदायक है। इसलिये 4 मार्च को धुलेण्डी पर्व मनाना शुभ होगा।
बैठक में सकल ब्राम्हण समाज, अग्रवाल, समाज, माहेश्वरी, समाज, र्स्वणकार समाज एवं विभिन्न समाजों के प्रतिनिधिगण व गैर समिति, पूजारी संघ, कर्मकाण्डीय विप्र परिषद के गणमान्यजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उपरोक्त जानकारी परिषद के अध्यक्ष पं. राधेश्याम उपाध्याय ने दी।


नीमच में 3 मार्च को चन्द्र ग्रहण मात्र 17 मिनिट दिखेगा-
(2) नीमच। फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा 3 मार्च 26 को होने वाला चन्द्रग्रहण चन्द्रमा उदय होने से पहले दिन में 3 बजकर 21 मिनिट से प्रारम्भ हो जाएगा। ग्रहण नीमच व आसपास के जिलों में चंद्रमा उदय के समय 6 बजकर 30 मिनिट बजे बाद ही दिखाई देगा वो भी मात्र 17 मिनिट के लिए क्योंकि 6 बजकर 47 मिनिट बजे तो ग्रहण समाप्त हो जाएगा। कर्मकाण्डीय विप्र परिषद के अध्यक्ष पं. राधेश्याम उपाध्याय  ने बताया कि चन्द्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च 2026 को प्रातः सूर्य उदय 6 बजकर 55 मिनिट बजे से ही प्रभावशील होकर ग्रहण पूर्ण होने तक शाम 6 बजकर 47 मिनिट तक रहेगा। सूतक व ग्रहण काल में प्रत्यक्ष पूजा निषेध होने से मंदिरों के पट बन्द रहेंगे। जो ग्रहण पूर्ण होने के उपरान्त स्नान, पूजन, श्रृंगार उपरान्त पुनः दर्शन हेतु खुलेंगे। सूतककाल में प्रत्यक्ष पूजा, भोजन, आहार लेना उचित नहीं। बालक, वृद्ध व रोगी वह जल व आहार ले सकते है जिसमें सूतक प्रारम्भ से पहले ही कुशा (डाब) रख दी गई हो। ग्रहण व सूतककाल में मानसिक जाप, भजन करना अत्यन्त लाभदायक मान्य है। उपरोक्त जानकारी कर्मकाण्डीय विप्र परिषद् मंत्री पं. जगदीशप्रसाद शर्मा ने दी।

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