नीमच। प्रदेश के शासकीय विद्यालय में अध्यनरत कक्षा1से आठवीं तक दर्ज छात्रों को प्रतिदिन के निर्धारित मेनू अनुसार संचालित महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा (मिड डे मील योजना) प्रधानमंत्री पूरक पोषण आहार योजना अंतर्गत मध्यान भोजन प्रदाय किया जा रहा है किंतु समय पर भोजन पकाने की लागत राशि नहीं मिलने से संचालित स्व सहायता समूह कर्ज के बोझ में डूबता जा रहा है क्योंकि प्रतिमाह समूह द्वारा किराना सामग्री आवश्यक मसाले नमक दालें तेल शक्कर दूध हरी संब्जिया ईधन (गैस टंकी) आदी क्रय करना होती है समय पर राशि नहीं मिलने सेसमूह की महिलाएं कर्ज लेकर योजना का संचालन कर रही है अब किराना दुकानदार द्वारा उधार सामग्री भी नही मिल रही है किन्तु कब तक राशि के अभाव में कर्ज लेती रहेगी महंगाई के इस दौर में समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के बजाय कर्ज में डूबती जा रही हैऔर शासन एवं विभाग को इन कामकाजी महिलाओं की चिंता नही है समय परउनके किए गए कार्य का भुगतान नही करने सेसमूह की महिलाएं आर्थिक रूप सेभारी परेशानियाँ का सामना कर रही है सरकार ने बजट में भी मध्यान भोजन में कार्यरत लाखो महिला रसोईया के मानदेय में भी कोई बढ़ोतरी का प्रावधान नहीं किया और ना ही प्रति बच्चे की भोजन पकाने की लागत दर बढ़ाने पर विचार किया इधर विभाग स्कूलों में प्रति दिनकी उपस्थिति का मात्र 70प्रतिशत बच्चों का ही खाद्यनि एवं राशि का भुगतान समूह को करते है जब की समूह वाले को सभी उपस्थित बच्चों कोभोजन प्रदाय करना होता है तो फिर खाद्यान्न एवं भोजन पकाने की लागत राशि भी उपस्थित बच्चों के मान से ही मिलना चाहिए विभाग द्वारा जून माह मे 15 दिन के भोजन पकाने का रसोइया का मानदेय भी नहीं दिया जाता संगठन द्वारा कई बार उक्त समस्याको लेकर मुख्यमंत्री महोदय एवं जनप्रतिनिधि महोदय को ज्ञापन प्रेषित कर अवगत करवा दिया गया किन्तू कोई कार्रवाई नहीं की गई महिला स्वयं सहायता समूह संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती माया मनोहर बैरागी द्वारा बताया गया है किआखिर शासन एवं विभाग बार बार बजट नही है का हवाला देकर इन कामकाजी महिलाओं का आर्थिक शोषण क्यो कीया जा रहा है क्यो इन्हें अपने हक अधिकार की माँग के लिए बार-बार ज्ञापन धरना आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ता है सरकार क्यों लाडली बहनों की तर्ज पर प्रतिमाह निश्चित दिनांक को भोजन पकाने की लागत राशि एवं रसोइया के मानदेय का भुगतान नहीं कर रही है महंगाई कि इस दौड़ मेंगरीब समूह की महिलाएं तीन-तीन चार-चार माह तक किस प्रकार किराना सामग्री ईंधन आदी क्रय करे महिला रसोइया की सुरक्षा के लिए निःशुल्क का बीमा एवं तत्काल आर्थिक सहायता स्वीकृत के लिए क्यों नीति नहीं बनाई जा रही है स्कूलों में छात्र संख्या कम का हवाला देकर लंबे समय से काम कर रही गरीब महिला रसोइया को क्यों हटाया जा रहा है महिला स्वयं सहायता समूह संगठन द्वारा शासन एवं विभाग से मांग की जाती है कि बकाया राशि का शीघ्र भुगतान नहीं होने पर पुनः1 मार्च2026 से पूरे प्रदेश भर में संचालित स्वयं सहायता समूह एव रसोइया चूल्हा बंद हड़ताल करने को मजबूर होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी उक्त जानकारी महिला स्वयं सहायता समूह संगठन के प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती सोना भरत प्रजापत अठाना द्वारा दी गई।