नीमच। राजस्थान जाने वाली निजी यात्री बसों की मंगलवार को हुई चक्काजाम हड़ताल ने सीमावर्ती नीमच जिले की रफ्तार थाम दी। सुबह से ही बस स्टैंड पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। सैकड़ों यात्री घंटों तक बसों के इंतजार में खड़े नज़र आए, लेकिन राजस्थान रूट की एक भी निजी बस सड़क पर नहीं उतरी।निजी बस संचालकों ने राजस्थान सरकार पर मनमाने और दमनात्मक आदेश थोपने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यात्री बसों में सफर के दौरान लगेज रहना सामान्य बात है। छोटे-बड़े व्यापारियों का सामान भी इन्हीं बसों से आता-जाता है, जिससे खाली बसों में ईंधन और रोड टैक्स का खर्च निकल सके। लेकिन यातायात पुलिस द्वारा बसों में किसी भी प्रकार का लगेज रखने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है। इतना ही नहीं, बसों की छतों पर लगी लोहे की जालियां तक हटवा दी गई हैं।बस ऑपरेटरों ने इसे “तुगलकी फरमान” बताते हुए सामूहिक रूप से बसों का संचालन बंद करने का निर्णय लिया। हड़ताल के चलते छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, चित्तौड़, भीलवाड़ा, उदयपुर अजमेर जयपुर, बांसवाड़ा और अन्य मार्ग पूरी तरह सूने पड़े रहे।इसका सबसे ज्यादा खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ा। इलाज के लिए जाने वाले मरीज,छात्र-छात्राएं, सब्जी व कृषि उत्पाद लेकर जाने वाले किसान, छोटे व्यापारी और अन्य लोग भारी परेशानी में नजर आए। कई यात्रियों को दोगुने-तीन गुने किराए पर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।नीमच जैसे सीमावर्ती जिले में राजस्थान रूट की बसें जीवनरेखा मानी जाती हैं। ऐसे में अचानक हुई इस हड़ताल ने प्रशासन और सरकार के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ना तय है। फिलहाल यात्रियों की नजरें सरकार और बस संचालकों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। बस संचालकों का कहना है कि जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती, हड़ताल अनिश्चितकालीन चलती रहेगी।