उज्जैन। उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड रोड का विरोध कर रहे 90 से अधिक गांवों के करीब एक हजार किसान राशन और बिस्तर लेकर बुधवार को उज्जैन पहुंच रहे हैं। वे कलेक्ट्रेट स्थित कोठी रोड पर डेरा डालेंगे और मांगें पूरी होने तक अनिश्चतकालीन प्रदर्शन करेंगे।
किसान 150 से अधिक ट्रैक्टर ट्रालियों से आ रहे हैं और वे कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। उनके दोपहर 12 बजे तक उज्जैन पहुंचने की संभावना है। किसान नेता राजेश सोलंकी ने बताया कि उज्जैन, इंदौर और रतलाम जिले के किसान आंदोलित हैं और बड़ी संख्या में उज्जैन पहुंच रहे हैं।
डेढ़ साल से सिर्फ आश्वासन मिलने पर नाराज किसान
किसानों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। इस कारण उन्होंने अनिश्चितकालीन धरने का फैसला लिया है।
एक्सेस कंट्रोल प्लान का किसान कर रहे विरोध
यह पहला मौका है जब दोनों प्रोजेक्ट के प्रभावित किसान एक साथ मैदान में उतरे हैं। किसानों का मुख्य विरोध प्रस्तावित सड़क के एक्सेस कंट्रोल प्लान को लेकर है। दरअसल, दोनों प्रोजेक्ट में सड़क 15 से 20 फीट ऊंचाई पर बनेगी। इससे गांवों को कनेक्टिविटी नहीं मिलेगी।
उनका कहना है कि सड़क को पुल नुमा ऊंचाई पर बनाने के बजाय जमीन स्तर पर बनाया जाए, ताकि गांवों को सीधे आवागमन की सुविधा मिल सके। वे कहते हैं कि जिस सड़क पर वे अपने वाहन नहीं चला सकते, उसके लिए जमीन क्यों दें?
बाजार दर पर मुआवजे की भी रखी मांग
किसानों ने अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार दर पर देने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
89 गांव हो रहे प्रभावित
इन दोनों प्रोजेक्ट से 89 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें उज्जैन के 56, इंदौर के 20 और रतलाम के 13 गांव शामिल हैं।