मुरैना शहर की मुख्य बाजार की सड़कों पर बुधवार दोपहर भीषण जाम की स्थिति बन गई। हालात इतने बिगड़ गए कि जाम में फंसे मरीजों की सांसें अटकती नजर आईं। एंबुलेंस और निजी वाहनों में बैठे बीमार लोग घंटों तक परेशान होते रहे, लेकिन यातायात व्यवस्था संभालने कोई जिम्मेदार मौके पर नजर नहीं आया।
जानकारी के अनुसार पॉलिटेक्निक कॉलेज से रामनगर तिराहे तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। वहीं रामनगर तिराहे से ओवरब्रिज तक सड़क पूरी तरह जाम रही। हालात तब और बिगड़ गए जब रेलवे अंडरब्रिज पर भी चारों ओर से वाहन फंस गए, जिससे पूरा इलाका जाम की चपेट में आ गया।
स्थिति इतनी विकट रही कि बाजार जाने वाले पैदल यात्री भी करीब एक घंटे तक जाम में फंसे रहे। दुकानदारों और व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण ग्राहकों की आवाजाही रुक गई और बाजार की गतिविधियां लगभग ठप हो गईं।
रोजाना जाम, लेकिन व्यवस्था ढीली
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जाम लगने के एक घंटे बाद तक भी कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। यातायात नियंत्रण की जिम्मेदारी मानो भगवान भरोसे रही। लोगों का कहना है कि शहर के कई प्रमुख चौराहों पर प्रतिदिन जाम की स्थिति बनती है, लेकिन पुलिस प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा।
यातायात पुलिस द्वारा रोजाना पॉइंट पर जवान तैनात किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कई प्रमुख पॉइंट पर कोई सिपाही नजर नहीं आता। खासकर जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर ई-रिक्शा और अन्य वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो कोई बड़ी घटना भी हो सकती है।
बैठकों में नियम, ज़मीन पर असर नहीं
हर बार सड़क सुरक्षा को लेकर बैठकें होती हैं, नियम बनाए जाते हैं और प्रस्ताव रखे जाते हैं। मंगलवार को भी कलेक्टर द्वारा सड़क सुरक्षा की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई प्रस्ताव सामने आए। लेकिन सवाल यह है कि इन नियमों को धरातल पर कब लागू किया जाएगा?
खबर लिखे जाने तक जाम की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी और शहर की आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होती दिखीं। मुरैना की जनता अब प्रशासन से स्थायी समाधान और सख्त यातायात व्यवस्था की मांग कर रही है, ताकि रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिल सके।